फ्यूल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है। फ्यूल प्रोजेक्ट की मदद से कंप्यूटर पर स्थानीय भाषाओं का प्रयोग बढ़े, इस पर काम किया जा रहा है।
भाषायी कंप्यूटर के मानकीकरण के लिए काम कर रहा फ्यूल प्रोजेक्ट स्थानीय भाषा में सॉफ्टवेयर बनाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।
यह बात सैम पित्रोदा ने पुणे में हुए एक कार्य्रकम में स्काइप के माध्यम से दिए अपने भाषण में कही।
उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा में पर्याप्त एप्लीकेशन की जरूरत है।
उन्होंने आशा जताई कि 2020 तक हम काफी मज़बूत हो जाएंगे और स्थानीय भाषा में काफी ऐप्लीकेशन बन चुके होंगे।
पित्रोदा ने अपने भाषण में ओपन सोर्स के तौर-तरीकों पर भरोसा जताया।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार सूचना सामग्री के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है।
रेड हैट इंजीनियरिंग के निदेशक सतीश मोहन ने बताया कि यह ओपन सोर्स प्रोजेक्ट रेड हैट की पहल पर राजेश रंजन ने सामुदायिक प्रोजेक्ट के तौर पर आरंभ किया था। फ़्यूल से जुड़े अंकित पटेल, सत्यव्रत मैत्रा, और चंद्रकांत धूतडमल ने भी अपनी बातें रखीं।
इसमें सीएसडीएस के इतिहासकार रविकांत, विकिमीडिया इंडिया के अध्यक्ष सुधन्वा जोगलेकर , सीडैक जिस्ट के सहायक निदेशक और विभागाध्यक्ष हमेश कुलकर्णी और फ़्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक राजेश रंजन भाग ले रहे थे।