तीसरा फ्यूल जिल्ट कॉन्फरेंस 2015 मूसलाधार बारिश से जूझ रही चेन्नई में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय यह सम्मेलन 20 नवंबर को चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय के टैग ऑडिटोरियम में आरंभ हुआ।
इसके उद्घाटन सत्र को मोजिला के लोकलाइजेशन ड्राइवर एक्सेल हेच्ट, आईआईटी मद्रास की प्रोफेसर हेमा मूर्ति, आईआईटी मद्रास के ही हेमचंद्रण कराह और सीडैक के सहायक निदेशक जसजीत सिंह ने संबोधित किया।
उद्घाटन सत्र का आरंभ करते हुए फ्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक राजेश रंजन ने फ्यूल प्रोजेक्ट के बारे में उपस्थित श्रोताओं को बताया। उन्होंने कहा कि महज सामुदायिक योगदान और कुछ संगठनों की मदद के बदौलत भाषाई संसाधन का यह प्रोजेक्ट दुनिया की भाषाई संसाधन जैसे तकनीकी शब्दावली, स्टाइल गाइड आदि की सबसे बड़ी खुली परियोजना बन गई है।
मानक तकनीकी शब्दावली, स्टाइल गाइड, ट्रांसलेशन एसेसमेंट मैट्रिक्स सहित कई महत्वपूर्ण संसाधनों से लैस यह प्रोजेक्ट विश्वव्यापी भाषाई संदर्भ का बड़ा अभिलेख बन गया है।
गौरतलब है कि दुनिया की करीब 60 भाषाओं के भाषा समुदाय अभी इस परिजोयना से जुड़ी हुई है। पहले दिन के शाम के पैनल डिसक्शन में मोजिला की पेइंग मो और आर्की तथा अवाया के जी करूणाकर और फ्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक राजेश रंजन के मॉडरेशन में खुली परिचर्चा हुई।
तमिलनाडु के स्थानीय भाषाई तकनीक विशेषज्ञों के अलावा इस सम्मेलन में भारत और नेपाल के विभिन्न भाषा-भाषाई करीब पचास से अधिक लोग उपस्थित हुए। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का पहला दिन सभी लोगों के लिए खुला था जबकि अगला दो दिन मोजिलालोकलाइजेशन हैकाथन का कार्यक्रम चला जिसके लिए सहभागी खास तौर पर आमंत्रित किए गए थे।
लोकलाइजेशन स्रोत भाषा से स्थानीय भाषा में किसी उत्पाद को बदलने की पूरी तकनीकी प्रक्रिया को कहा जाता है। इसके अंतर्गत मोजिला के विभिन्न उत्पादों के लोकलाइजेशन यानी स्थानीयकरण की प्रक्रिया, उसमें सुधार और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
पूरे कार्यक्रम का संचालन सी-डैक के तकनीकी अधिकारी चंद्रकांत धूताडमल ने किया। भाषाई कंप्यूटिंग के लिए मानक भाषाई संसाधन और औजार बनाने में पिछले सात सालों से जुटी फ्यूल परियोजना के द्वारा 2013 में आरंभ किए गए इस सम्मेलन के प्रायोजक और आयोजक दुनिया की जानी-मानी कंपनियाँ मोजिला, सी-डैक और रेड हैट हैं।