क्या आप जानते हैं कि जानलेवा बीमारी डेंगू के लिए केवल मच्छर ही नहीं बल्कि मेंढक भी जिम्मेदार हैं। चौंकिए मत, दरअसल पानी में पैदा होने वाले मच्छरों के लारवा को मेंढक खा जाते हैं। मगर अब मेंढकों की संख्या में लगातार हो रही कमी के चलते मच्छरों सहित जल जनित रोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि पर्यावरणविद मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य जल जनित रोगों के बढ़ने के लिए लोगों के खानपान की आदतों के अलावा ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन को भी एक बड़ी वजह मानते हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि इस बार राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू के लिए जिम्मेदार मच्छर की नई प्रजाति ‘एशियन टाइगर’ सामने आई है। माना जा रहा है कि इस प्रजाति पर मच्छरों से निपटने के मौजूदा तंत्र का भी कोई असर नहीं पड़ रहा है।
वहीं, उदयपुर वाइल्डलाइफ वार्डन आरिफा के अनुसार मच्छरों की बढ़ती संख्या के लिए मेंढकों की कमी के साथ ही छोटी मछलियों की संख्या में आई गिरावट भी बड़ी वजह है। उन्होंने बताया कि यह छोटी मछलियां न केवल मच्छरों के लारवा को खत्म करती हैं, बल्कि भोजन की जरूरतों को पूरा करने में भी इनका अहम स्थान है। गौरतलब है कि डेंगू के कारण प्रख्यात फिल्ममेकर यश चोपड़ा के निधन से पूरा देश स्तब्ध रह गया था।
पर्यावरणविद रजा तहसीन का कहना है कि मेंढक भारतीय उपमहाद्वीप से गायब होते जा रहे हैं। मच्छरों के लारवा के लिए मेंढक सबसे बड़ा खतरा हैं, क्योंकि वह भोजन के मामले में लारवा पर ही ज्यादा निर्भर होते हैं।
मेंढक बचाओ अभियान
वैज्ञानिकों, शिक्षकों, नेताओं और पर्यावरणविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने सेव द फ्रोग नाम से एक अभियान शुरू किया है। समूह ने इस वर्ष 28 अप्रैल को चौथा वार्षिक सेव द फ्रोग डे आयोजित किया। भारत में मुख्य आयोजन गुवाहाटी के असम में किया गया।
-1200 मामले इस साल अभी तक दर्ज हुए डेंगू के दिल्ली में
-857 मामले पिछले साल दिल्ली में दर्ज हुए थे डेंगू के