टूजी मामले पर ड्राफ्ट रिपोर्ट को लेकर विवादों में घिरी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को मानसून सत्र तक एक और कार्यकाल विस्तार मिलना तय हो गया है।
लोकसभा में आनन फानन में लाए गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई। अब प्रस्ताव को मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यह समिति का पांचवां विस्तार होगा।
कांग्रेस ने विवादित ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। इसके लिए पार्टी पूरी रिपोर्ट को ही खारिज करने पर आमादा भाजपा को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि इस मामले में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने यह कहकर तीखे तेवर बरकरार रखने का संकेत दिया है कि पार्टी ने समिति के कार्यकाल विस्तार को समर्थन दिया है, समिति के अध्यक्ष पीसी चाको को नहीं। समिति का कार्यकाल आगामी दस मई को खत्म हो रहा था।
कार्यकाल विस्तार का फैसला आनन फानन में हुआ। सदन के अंदर ही समिति के अध्यक्ष पीसी चाको ने अन्य सदस्यों से सहमति हासिल करने के बाद इससे संबंधित प्रस्ताव पर संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ के साथ चर्चा की।
इसके बाद दोनों ने प्रस्ताव सदन में पेश करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से बात की। अंतत: दोपहर बाद इस आशय का प्रस्ताव चाको ने सदन में रखा जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
सरकार ने ड्राफ्ट रिपोर्ट को समिति से मंजूरी दिलाने के लिए भाजपा को अलग-थलग करने की रणनीति बनाई है। पहले योजना थी कि मंगलवार को ही समिति की बैठक बुलाकर रिपोर्ट पर मुहर लगवाने का प्रयास किया जाए।
बाद में इस मसले पर अन्य दलों से एक बार और संपर्क साधने का फैसला किया गया। सरकार के सूत्रों के मुताबिक भले ही समिति के आधे सदस्यों ने चाको के खिलाफ अविश्वास व्यक्त किया है, लेकिन इनमें से भाजपा, द्रमुक और अन्नाद्रमुक को छोड़कर अन्य कोई दल रिपोर्ट को सिरे से खारिज करने के पक्ष में नहीं है।
सपा की आपत्ति केवल पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा को न बुलाए जाने पर है। ऐसे में इन दलों को रिपोर्ट में थोड़ा बहुत बदलाव का प्रस्ताव देकर मनाया जा सकता है।
इसके अलावा सरकारी सूत्रों का दावा था कि जेपीसी से संबंधित नियम 261 और 262 में मतदान में कोई नतीजा न निकलने पर समिति के अध्यक्ष के पास बतौर सदस्य और बतौर अध्यक्ष दो वोट डालने का अधिकार है।
ऐसे में आधे सदस्य के विरोध के बावजूद अगर सरकार सपा को मना पाई तो वह इसी ड्राफ्ट रिपोर्ट को पारित कराने में सफल हो जाएगी।