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फिर लटकी शहरी गरीबों को मुफ्त इलाज देने की योजना

Sat, 20 Apr 2013 12:15 AM IST
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली
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यूपीए सरकार की गेम चेंजर योजनाओं में शुमार राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) को इस साल लगातार दूसरी बार कैबिनेट की हरी झंडी नहीं मिल पाई।
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एक बार वित्त मंत्री पी चिदंबरम की आपत्ति इसके लटकने का कारण बनी तो दूसरी बार उनकी अनुपस्थिति।

बीते बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस योजना को हरी झंडी देने से पहले वित्त मंत्री का इंतजार करने का निर्णय लिया गया।

कैबिनेट की अगली बैठक में वित्त मंत्री का रुख ही शहरी गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली इस योजना का भविष्य तय करेगा।

सूत्रों के मुताबिक चिदंबरम ने इसी साल फरवरी के तीसरे सप्ताह में हुई कैबिनेट की बैठक में इस योजना संबंधी प्रस्ताव की तैयारियों पर सवाल उठाए थे।
 
उनका कहना था कि चूंकि योजना को लागू करने के लिए आधारभूत संरचना तैयार नहीं है, इसलिए इसे जल्दबाजी में लागू करने से कोई लाभ नहीं मिलने वाला।

उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारी भरकम राशि वाली यह योजना परवान नहीं चढ़ सकेगी। इस कारण न तो गरीबों को लाभ मिलेगा और न ही सरकार इसका सियासी लाभ ही उठा पाएगी।

बहरहाल कैबिनेट की बैठक में जब इस आशय का प्रस्ताव आया तो कई मंत्रियों ने कहा कि चूंकि आपत्ति चिदंबरम की थी और वह विदेश में हैं, इसलिए इसे मंजूरी देने से पहले उनका इंतजार कर लिया जाए।
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सूत्रों का कहना है कि अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट की अगली बैठक में पेश किया जाएगा। वैसे माना जा रहा है कि चुनावी माहौल शुरू हो जाने के कारण एनयूएचएम को जल्द हरी झंडी मिलना तय है।

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में शुरू किए गए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) को मिली बेहतर सफलता और लोकप्रियता के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनयूएचएम का प्रस्ताव तैयार किया।
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मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) का गठन कर इसके अधीन एनआरएचएम और एनयूएचएम को लाने की पहल की।

सरकार के रणनीतिकारों की योजना एनयूएचएम के माध्यम से लगभग आठ करोड़ शहरी गरीबों तक मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा कर चुनावी फसल काटने की है।

इस योजना में देश के 779 छोटे-बड़े शहरों को जोड़ा गया है। इसलिए आनन फानन में योजना आयोग ने न केवल इस योजना से संबंधित 22 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकार किया, बल्कि इसे 12वीं योजना में तत्काल जगह भी दे दी थी।
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