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यूपी समेत चार राज्यों को एम्स का तोहफा

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को पेश किए गए आम बजट में उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का तोहफा दिया है। वित्त मंत्री ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, महाराष्ट्र के विदर्भ, प. बंगाल और आंध्रप्रदेश में नए एम्स की स्थापना की घोषणा की है। इन राज्यों के एम्स की स्थापना केलिए वित्त मंत्री ने तत्काल 500 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान भी कर दिया है।
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अपने-अपने राज्यों में एम्स की मांग को ले कर हंगामे पर उतारू सांसदों को वित्त मंत्री ने सभी राज्यों में एम्स की स्थापना का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के एम्स के तर्ज पर 6 राज्यों में पहले ही इस तरह के संस्थान की स्थापना की जा चुकी है।

फिलहाल राजधानी दिल्ली के अलावा जोधपुर, पटना, भोपाल, ऋषिकेश, भुवनेश्वर और रायपुर में एम्स की स्थापन हो चुकी है। बृहस्पतिवार को चार अन्य राज्यों में एम्स की स्थापना की घोषणा पूरी होने के बाद देश भर में ऐसे संस्थानों की संख्या 11 हो जाएगी।
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स्वास्थ्य क्षेत्र पर वित्त मंत्री मेहरबान

आम बजट में वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रति खासे मेहरबान नजर आए। उन्होंने न केवल चार राज्यों में एम्स की स्थापना की घोषणा की, बल्कि अगले पांच साल में सभी घरों में शौचालय उपलब्ध कराने का सरकार का लक्ष्या भी निर्धारित किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने पहले से अनुमोदित 58 मेडिकल कॉलेजों के अलावा 12 और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की घोषणा की। वित्त मंत्री ने देश के सभी अस्पतालों में दंत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी ऐलान किया।

चार नए एम्स की घोषणा के दौरान अलग-अलग राज्यों के सांसदों की अपने अपने सूबे में ऐसे ही संस्थान की स्थापना की जबर्दस्त मांग के बीच वित्त मंत्री ने इस योजना में सभी राज्यों को शामिल करने की मांग की। वित्त मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में उन सभी राज्यों के एम्स की स्थापना संबंधी प्रस्ताव को सरकार स्वीकार करेगी।

खासबात यह है कि बृहस्पतिवार को उन्हीं राज्यों में एम्स की स्थापना की घोषणा की गई, जहां या तो विधानसभा चुनाव होने हैं या फिर भाजपा अपना प्रभाव बढ़ाना चाह रही है। इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल को खास तरजीह देने के पीछे आमचुनाव में इस सूबे में मिली अप्रत्याशित सफलता को भावी विधानसभा चुनाव तक कायम रखने की है। जबकि महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश में पार्टी अपने दम पर खड़ा होने की रणनीति पर काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि बीते आमचुनाव में पश्चिम बंगाल में हालांकि भाजपा को लोकसभा की महज दो सीट ही मिली, मगर पार्टी के मत प्रतिशत में करीब 400 फीसदी का इजाफ हुआ।
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