बनारस में नरेंद्र मोदी के खिलाफ धर्मरिनरपेक्ष शक्तियों को एकजुट करने के नाम पर संयुक्त उम्मीदवार उतारने का फार्मूला बनने से पहले ही फेल होता दिख रहा है।
दरअसल, बसपा ने इस फार्मूले को मानने से इंकार कर दिया है। सपा सकारात्मक रुख तो दिखा रही है, लेकिन वह बसपा के साथ कांग्रेस के किसी स्थानीय उम्मीदवार को समर्थन देने को तैयार नहीं है।
'यूपी की हर सीट पर अपने बलबूते लड़ेगी बसपा'
कांग्रेस के अंदर चर्चा चल पड़ी है कि पार्टी बनारस में मोदी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने में इसलिए देरी कर रही है, क्योंकि वह मोदी के खिलाफ कांग्रेस, बसपा और सपा का संयुक्त उम्मीदवार उतारने की कोशिश कर रही है। मगर बसपा ने इसे मानने से दो टूक इंकार कर दिया है।
उत्तर प्रदेश बसपा के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते है कि जिस पार्टी को बनारस में उम्मीदवार नहीं मिल रहा है वे ही ऐसे फार्मूले को लागू करे। बसपा अपने बलबूते उत्तर प्रदेश की हर सीट पर चुनाव लड़ेगी।
'कांग्रेस के किसी दिग्गज को ही समर्थन देगी सपा'
उधर, सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल कहते हैं कि धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को एकजुट होकर सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ना चाहिए। मगर बसपा से किसी तरह का गठजोड़ की संभावना नहीं है।
पार्टी यह भी संकेत दे रही है कि सपा कांग्रेस के किसी दिग्गज उम्मीदवार पर ही अपना समर्थन देगी। वे कांग्रेस के स्थानीय उम्मीदवार राजेश मिश्रा या अजय राय के नाम पर सहमत नहीं है।