कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआई की पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से पूछताछ का भाजपा ने न केवल स्वागत किया है, बल्कि इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ नई सरकार के कड़े रुख का परिणाम बताया है।
पार्टी ने जांच एजेंसी से इस घोटाले में लाभ हासिल करने वाले राजनीतिज्ञों को भी सामने लाने और सजा दिलाने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के संभव ही नहीं था। ऐसे में सीबीआई को जांच के दौरान कॉरपोरेट घरानों के इस घोटाले में आर्थिक लाभ हासिल करने वाले राजनीतिज्ञों के खिलाफ भी जांच करनी चाहिए।
पार्टी ने इस दौरान पूर्व पीएम से हुई पूछताछ में सरकार का हाथ होने से इनकार किया। उसने कहा कि चूंकि नई सरकार में सीबीआई बिना किसी दबाव में काम कर रही है, इसलिए जांच एजेंसी ने यह निर्णय विशेष अदालत के निर्देश के अनुरूप लिया होगा। उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने तीन दिन पहले पूर्व पीएम से हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में पूछताछ की थी।
घोटाले के समय मनमोहन के पास था प्रभार
पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान पूर्व पीएम को तत्कालीन सरकार और कांग्रेस लगातार पूछताछ से बचाती रही, जबकि तथ्य यह है कि घोटाला यूपीए 1 सरकार के कार्यकाल के दौरान उस समय अंजाम दिया गया, जब कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन के पास था।
राव ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए कोयला मंत्रालय का जिम्मा संभालने वाले तत्कालीन पीएम से पूछताछ जरूरी थी। मगर कांग्रेस और तत्कालीन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।
राव ने इस दौरान सीबीआई जांच के दायरे में महज कंपनियों और कॉरपोरेट घराने के आने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा घोटाला बिना बड़े राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं था। इसलिए सीबीआई को उन राजनीतिक चेहरों को भी बेनकाब करना चाहिए, जिन्हें इस घोटाले में बड़ा आर्थिक लाभ हासिल हुआ।
मनमोहन से पूछताछ नहीं, जानकारी मांगी गई
दिल्ली विधानसभा चुनाव से ऐन पहले मनमोहन सिंह से सीबीआई की पूछताछ ने कांग्रेस को असहज कर दिया है। वह पूर्व पीएम के बचाव में उतर गई है।
पार्टी का कहना है कि सीबीआई ने मनमोहन से पूछताछ नहीं की, बल्कि उनसे कुछ जानकारी ली गई है। साथ ही उसने दूसरी पार्टियों पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
पार्टी इस बात को लेकर ज्यादा असहज है कि दिल्ली चुनाव के बीच सीबीआई के मनमोहन सिंह से पूछताछ करने के चलते भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर उछल गया है।
विरोधी दल भ्रष्टाचार के मुद्दे को ढाल बनाकर कांग्रेस को निशाने पर ले रहे हैं। कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि दिल्ली चुनाव के समय पूर्व प्रधानमंत्री से सीबीआई की पूछताछ के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है।
हालांकि, पार्टी यह आरोप खुलकर नहीं लगा रही है। मगर चुनाव के समय इस प्रकरण से पार्टी नुकसान की संभावना मान रही है। पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी है। पार्टी के सामने मनमोहन सिंह की छवि को दाग से बचाने की बड़ी चुनौती है।
बुधवार को पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मनमोहन सिंह न्याय के पक्षधर हैं और वह खुद कह चुके हैं कि उनसे पास जो बताने के लिए है, उसे वह बताने को तैयार हैं। वह कोई चीज छिपाने के पक्षधर नहीं हैं।
कोयला खदानों के आवंटन में गड़बड़ियों को लेकर सीबीआई ने पूर्व प्रधानमंत्री से बात की। इस विवादित आवंटन के समय कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन सिंह के पास था। हालांकि, भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से सफाई दी गई है कि पूर्व प्रधानमंत्री से सीबीआई की पूछताछ में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।