हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एचएसजीपीसी) का विरोध कर रहे पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की कोशिशें रंग दिखाने लगी हैं।
केंद्र सरकार ने हरियाणा के राज्यपाल को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार की ओर से किए गए एसजीपीसी के गठन को असंवैधानिक करार दिया है।
इसमें कहा गया है कि इस तरह के कानून को पारित करने का हक संसद को है। जब पहले से कानून मौजूद तब उसी विषय पर दोबारा कानून पारित करने का औचित्य नहीं है। साथ ही केंद्र ने राज्यपाल से बिल को दी गई मंजूरी को वापस लेने को कहा है।
केंद्र की प्रतिक्रिया से राज्यपाल पर दबाव
केंद्र की इस प्रतिक्रिया के बाद अब राज्यपाल पर दबाव बन गया है। अब देखना यह कि वह एचएसजीपीसी के गठन पर अंतिम फैसला क्या लेते हैं?
हालांकि शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर प्रकाश सिंह बादल ने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की बल्कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलकर इस मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए केंद्र से उचित कदम उठाने को कहा।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर हरियाणा सरकार के इस कदम को सिखों में फूट डालने वाला बताया और कहा कि इससे स्थितियां खराब होंगी।
बादल ने कहा कि सिखों की एकमात्र संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन केंद्रीय कानून के आधार पर किया गया है। इसमें कोई भी राज्य सरकार अपना दखल नहीं दे सकती है। इसी को आधार बनाकर केंद्र सरकार हरियाणा सरकार पर दबाव बना सकती है।
पीएम, राजनाथ और जेटली से मिले सीएम बादल
पीएम से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले। यहीं उनकी मुलाकात वित्त मंत्री अरुण जेटली और गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू से हुई।
बादल को यहीं जानकारी दी गई कि केंद्र की ओर से इस संबंध में हरियाणा के राज्यपाल को पत्र लिखा गया है। जिसमें राज्यपाल से कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से किया गया एचएसजीपीसी का गठन पूरी तरह से असंवैधानिक है। ऐसे में वह इस पर अंतिम निर्णय लें।
केंद्र की ओर से यह कदम उठाए जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल शनिवार को चंडीगढ़ में अपनी कोर कमेटी की बैठक करने जा रहा है। बैठक में इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।