काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ावे की रकम में बड़े पैमाने पर गोलमाल सामने आ रहा है। गर्भगृह में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच के बाद कई चेहरों के बेनकाब होने के संकेत मिले हैं।
इसके लिए मुख्य कार्यपालक समिति की ओर से गठित मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति ने चढ़ावा की हेराफेरी करते चार और पुजारियों की फुटेज पकड़ी है। इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है।
चर्चा है कि यह चोरी लंबे समय से की जा रही थी। इस तरह से अब तक कितनी रकम पुजारियों ने उड़ाई, फिलहाल इसका कोई हिसाब नहीं है लेकिन अब शिकंजा कसने से गर्भगृह से लेकर काउंटर तक तैनात पुजारियों, लिपिकों के होश उड़ गए हैं।
पैर के पास रकम छिपाते दिखे पुजारी
बाबा के गर्भगृह में लगे सीसीटीवी कैमरे से सात फुटेज फिर ऐसे पाए गए हैं, जिनमें पुजारियों को चढ़ावा की रकम हुंडी में न रखकर पैर के पास छिपाते और ले जाते देखा गया है। इसमें कुछ फुटेज गर्भगृह के बाहर लगे कैमरों से मिले हैं।
अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय सुशील कुमार गौड़ के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने ऐसे सभी सात फुटेज के आधार पर संबंधित पुजारियों की रिपोर्ट तैयार कर ली है।
हाल में ही फुटेज के आधार पर एक पुजारी का निलंबन किए जाने के बाद अब जांच टीम पर दबाव डाला जा रहा है कि गर्भगृह और काउंटर पर लगे कैमरों के पुराने फुटेज भी निकालकर जांच कराई जाए, ताकि बाबा के चढ़ावा की रकम में हुए गोलमाल में शामिल अन्य पुजारियों को भी चिह्नित किया जा सके। इसकी जानकारी मंडलायुक्त को भी दी जा चुकी है।
घबराए पुजारियों ने शुरू की बचाव की भागदौड़
मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय कुमार अवस्थी ने स्वीकार किया कि सात और फुटेज पाए गए हैं। इसमें गर्भगृह के ही चार और पुजारी हैं, जबकि तीन फुटेज निलंबित पुजारी गणपति झा के ही बताए जा रहे हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आते ही परीक्षण कराकर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
फुटेज के आधार पर पुजारियों की रिपोर्ट तैयार कराए जाने और कार्रवाई से घबराए पुजारियों ने बचाव के लिए भागदौड़ शुरू कर दी है। इसके लिए सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त पत्र तैयार कराया जा रहा है। इस पत्र को लेकर वह मंडलायुक्त/मुख्य कार्यपालक समिति के अध्यक्ष नितिन रमेश गोकर्ण से मिलेंगे।
पुजारियों का कहना है कि उनका दक्षिणा लेने का अधिकार है। जो मानदेय मिलता है, उसमें गुजारा होना संभव भी नहीं है। इसके अलावा ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पूजा कराने के बाद दक्षिणा न ली जाए।