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'फैलिन' के चलते कोहरे से मिलेगी निजात

Thu, 17 Oct 2013 12:25 AM IST
अखिलेश कुमार/दिल्ली
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश में फैलिन चक्रवात भले ही तबाही मचा चुका हो, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों के लिए फैलिन राहत लेकर आया है।
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश में फैलिन चक्रवात भले ही तबाही मचा चुका हो, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में इसके चलते कोहरा लोगों पर कहर नहीं बरपा सकेगा।

लंबे समय तक मानसून के टिकने के कारण मौसम बदलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सामान्य तौर पर 21 सितंबर को मानसून की विदाई के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आता है, लेकिन इस बार अचानक परिवर्तन के आसार हैं।

हिमालय से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं अगले कुछ दिनों में सर्दी बढ़ा देंगी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यदि तूफान अक्तूबर के बजाय नवंबर में आता तो कोहरा उत्तर पश्चिम भारत को खूब परेशान करता।
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गत वर्ष आए नीलम तूफान के बाद भी कुछ ऐसा ही पूरे उत्तर पश्चिम भारत में देखने का मिला था। सर्दी के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में फैलिन का असर नहीं दिखेगा।

कोहरा बनने के लिए 10-12 डिग्री के बीच न्यूनतम तापमान, हवा में 75 फीसदी से अधिक नमी और 6-8 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा का चलना जरूरी है। अभी तापमान 20 डिग्री के आसपास चल रहा है। इसलिए फैलिन के कारण कोहरा पड़ेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के उप महानिदेशक डॉ. ओपी सिंह का कहना है कि मानसून के दौरान पूर्वी हवाएं चलती हैं, जो नमी लेकर आती हैं। मानसून की विदाई होते ही हिमालय क्षेत्र में बनने वाले प्रति चक्रवात के चलते ठंडी और शुष्क हवाएं आती हैं। अक्सर देखा गया है कि मानसून की विदाई देरी से होने पर अचानक मौसम बदल जाता है। ऐसा ही इस बार भी होने वाला है। इससे पहले 1956 और 1959 में रिकार्ड 111 दिन रुकने के बाद 13 अक्तूबर को मानसून विदा हुआ था।

124 दिन टिकने का रिकार्ड बनाने के बाद मानसून 17 अक्तूबर के बाद उत्तर-पश्चिम भारत से विदा हो जाएगा। इसके बाद दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और पश्चिमी यूपी के बड़े हिस्से में सर्दियां शुरू हो जाएंगी।

वैसे मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के ज्यादा दिन तक टिकने से सर्दी या कोहरे का सीधा संबंध नहीं है, लेकिन मानसून की वापसी के तुरंत बाद प्रति चक्रवात के चलते हिमालय से आने वाली उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं सर्दी बढ़ा देंगी।
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मानसून सीजन (1 जून से 30 सितंबर) में बारिश का रिकॉर्ड
:- देशभर में सामान्य से 6 फीसदी अधिक 937 मिमी बारिश हुई।
:- उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 9 फीसदी अधिक 672 मिमी बारिश दर्ज की गई।
:- मध्य भारत में सामान्य से 23 फीसदी अधिक 1193 मिमी बारिश हुई।
:- उत्तर पूर्वी भारत में सामान्य से 28 फीसदी कम 1038 मिमी बारिश दर्ज।
:- दिल्ली-एनसीआर में सामान्य से 35 फीसदी अधिक 876 मिमी बारिश हुई।
:- पश्चिम राजस्थान में सामान्य से 28 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।
:- मानसून लंबे समय तक रुकने के बावजूद देश भर में सितंबर में सामान्य से 14 फीसदी कम 149 मिमी बारिश हुई।
:- पोस्ट मानसून सीजन में अक्तूबर के शुरुआती 15 दिन के दौरान देशभर में सामान्य से 57 फीसदी अधिक 79 मिमी बारिश दर्ज की गई।
:- पोस्ट मानसून सीजन के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 65 फीसदी अधिक 90 मिमी बारिश हुई। पूर्वी यूपी में 115 फीसदी, पश्चिम यूपी में 63 फीसदी, दिल्ली में 217 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 79 फीसदी व पश्चिम राजस्थान में 193 फीसदी अधिक बारिश हुई।
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