दो घर एक ही मीटर से बिजली की सुविधा का उपभोग करते पकड़े गए हों। ऐसा तो आपने सुना होगा। लेकिन आपको यह जान कर हैरानी होगी कि देश के प्रधानमंत्री निवास समेत पांच बंगलों में बिजली आपूर्ति एक ही मीटर के जरिए की जा रही है। प्रधानमंत्री निवास और कार्यालय के बिजली उपभोग से जुड़ी यह जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में दी गई है।
आरटीआई के जवाब में यह जानकारी भी दी गई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय तीनों एक ही मीटर से काम चला रहे हैं। इन सभी के बिजली उपभोग का वार्षिक बिल इतना है जितने का एक आम आदमी पूरे जीवन में भुगतान नहीं करता होगा।
दिल्ली के विद्युत भवन कार्यालय कार्यपालक अभियंता की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि 6 मौलाना आजाद रोड स्थित उपराष्ट्रपति भवन का वर्ष 2011 का सलाना बिल करीब 25 लाख रुपये और 2012 का 34 लाख रुपये बिजली विभाग को भुगतान किया गया है। जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसके मीटर से विदेश और रक्षा मंत्रालय को भी सेवाएं दी जा रही है, उसका 2011 का बिल 4,18,23,102 रुपये और 2012 का बिल 6,92,18,168 रुपये का भुगतान किया गया है।
आरटीआई के जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का अलग से कोई मीटर नहीं है और तीनों कार्यालयों का काम एक ही बिजली के मीटर से चल रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में कार्यपालक अभियंता ने बताया है कि प्रधानमंत्री निवास का बिजली का मीटर सिर्फ उनके बंगले में ही बिजली आपूर्ति नहीं करता। बल्कि प्रधानमंत्री के बंगले 3 आरसीआर के अलावा चार अन्य बंगलों को भी बिजली उपलब्ध कराता है।
इन बंगलों में 1 आरसीआर, 7 आरसीआर, 5 आरसीआर और 9 आरसीआर हैं। ये तमाम बंगले पीएम आवास की परिधि में हैं। आरटीआई में कहा गया है कि प्रधानमंत्री समेत पांच बंगलों को बिजली उपलब्ध कराने वाले मीटर का 2011 का बिल 1,21,05,374 रुपये और 2012 का 1,50,86,400 रुपये भुगतान किया गया था।
आरटीआई के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बिजली के खर्च व अन्य सवालों का जवाब नहीं दिया गया है क्योंकि यह सूचनाएं इस कार्यालय से संबंधित नहीं थीं।