प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। इस मौके पर मोदी जमकर बोले।
विधानसभा चुनावों में भारी जीत के बाद मोदी का यह पहला संबोधन था। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने एम्स से निकलने वाले छात्रों और भावी डॉक्टरों को अलग और सार्थक जीवन जीने के गुरुमंत्र भी दिए।
अपने संबोधन से पहले मोदी ने एम्स के प्रोफेसर वेनुगोपाल को सम्मानित किया। प्रो. वेनुगोपाल को भारत में पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने का श्रेय है जो इन्होंने 1994 में किया था।
मोदी ने छात्रों से कहा कि थोड़ी देर में स्वास्थ्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन कई छात्रों को अवार्ड देंगे लेकिन वह खुद अवार्ड पाने लायक छात्र कभी नहीं बन पाए।
'मुझे कभी अवार्ड पाने का मौका नहीं मिला'
मोदी ने छात्रों से कहा कि आपमें से कई लोगों को अच्छे प्रदर्शन के लिए अवार्ड दिया जाएगा लेकिन उन्हें कभी भी अवार्ड पाने का मौका नहीं मिला।
अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मोदी ने कहा कि वह कभी अच्छे छात्र नहीं रहे। मोदी ने आगे कहा कि डॉक्टर अपनी जिम्मदारियों को गंभीरता से लें पर जीवन गंभीरता से न जिएं। क्योंकि जीवन गंभीरता से नहीं जीना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आज आप अपना शैक्षिक जीवन पूरा कर रहे हैं लेकिन जीवन में कुछ पाने के लिए हमेशा मन में छात्र जीवन को यानी सीखने की इच्छा को बनाए रखना चाहिए। छात्र मन से जीवन को ऊर्जा मिलती है और जीवन सामर्थ्यवान बनता है।
'गरीब बच्चों को बनाएं स्पेशल गेस्ट'
प्रधानमंत्री मोदी ने दीक्षांत समारोह के आयोजकों से कहा कि उनका मन है कि इस कार्यक्रम में ग्रामीण इलाकों के कुछ गरीब बच्चों को विशेष अतिथि के रूप में बुलाने की परंपरा शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े समारोह में किसी अमीर का बेटा आता है तो उसे यह कार्यक्रम कोई खास महत्व नहीं रखता क्योंकि उसका पिता भी डॉक्टर है। लेकिन जब आप किसी गरीब के बच्चे को इस कार्यक्रम में बुलाएंगे तो उसे एक नई दुनिया को देखने का मौका मिलता है और उसके मन में भी कुछ बनने का सपना जागता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी गरीब के बेटे को ऐसे कार्यक्रम में आने का मौका मिलता है तो उसे भी कुछ करने का कुछ बड़ा बनने का ख्वाब जागता है। और देश के विकास के लिए आम लोगों में ऐसा ख्वाब जगाना बहुत जरूरी है ताकि वह भी देश के विकास का हिस्सा बन पाएं।
किस ढंग से सोचें छात्र?
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सोचने का नजरिया की हमारा जीवन बदलता है। छात्र सोंचे कि क्या हम आज अच्छी बिल्डिंग की वजह से अच्छे डॉक्टर बने या अच्छे प्रोफेसर की वजह से या अपनी खुद की मेहनत से।
मोदी ने कहा कि अगर आप सोचने का तरीका बदलेंगे तो जिंदगी को देखने का दृष्टिकोण बदल जाएगा। जीवन में कुछ भी बनने वाले लोग सोचें कि उन्हें समाज का एक हक उनका मिला है जिसको अदा करने के लिए वह पूरी जिंदगी लगा देंगे।
मोदी ने नए डॉक्टरों और छात्रों से आग्रह किया कि वह साल में सिर्फ 7 दिन अपने साथियों के साथ किसी जंगल या गरीबों के बीच बैठने में गुजारें। और अभी तक उन्हें जो ज्ञान मिला है उसे वहां के गरीबों के बीच बांटें।
उन्होंने आगे कहा कि मरीज की बीमारी ठीक करना ही डॉक्टर का काम नहीं है बल्कि उनके अंदर बीमारी से लड़ने का आत्मविश्वास पैदा करने का काम भी डॉक्टरों का ही है।