बॉलीवुड अभिनेता प्राण का अंतिम संस्कार शनिवार को शिवाजी पार्क में किया गया। शुक्रवार की रात मुंबई स्थित लीलावती अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
20 फरवरी, 1920 को उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। तीन बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजे जा चुके बॉलीवुड के सफलतम खलनायकों में शुमार प्राण को हाल ही में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया था।
वर्ष 2000 में स्टारडस्ट ने उन्हें ‘विलेन ऑफ द मिलेनियम’ घोषित किया था। कपूरथला, उन्नाव, मेरठ, देहरादून और रामपुर से प्राण का संबंध रहा है, उनकी शिक्षा इन शहरों में हुई है।
फोटोग्राफर बनने की चाह रखने वाले प्राण (वास्तविक नाम प्राण किशन सिकन्द) ने लाहौर में 1940 में ‘यमला जट’ नाम की पंजाबी फिल्म से रुपहली दुनिया में पहला कदम रखा था।
इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। करियर के दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और कई तरह के किरदार निभाए। मगर उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता खलनायक के रूप में मिली।
‘राम और श्याम’ में उन्होंने खलनायक के किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया था कि असल जिंदगी में भी लोग उन्हें उसी तरह का व्यक्ति समझने लगे थे।
फिल्म उपकार (1968), आंसू बन गए फूल (1970) और बेईमान (1973) के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। बंटवारे के बाद वह मुंबई में बस गए थे।