महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने संबंधी सरकार का नया अध्यादेश और अपराध कानून संशोधन बिल बजट सत्र के शुरू में ही पेश कर दिया जाएगा।
सरकार की योजना है कि सदन की बहस के दौरान अध्यादेश और बिल में फेरबदल की जरूरत पड़ी तो बिल पर पहले से काम कर रही स्थायी समिति चार पांच दिन के भीतर ही इन पर फैसला कर इसे फिर से सदन में फिर पेश कर देगी। केंद्र की कोशिश है कि बजट से पहले ही अध्यादेश और बिल दोनों को संसद की हरी झंडी मिल जाए। संशोधन बिल पर स्थायी समिति की अगली बैठक 11 फरवरी को होगी।
गृह मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने बताया कि राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने समिति को 21 फरवरी से पहले बिल पेश करने की तैयारी करने का निर्देश दिया है।
दरअसल अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर के बाद स्थायी समिति इस बात को लेकर असमंजस में थी कि अब अपराध संशोधन बिल पर बहस की वाकई जरूरत है या नहीं। तकनीकी कारणों को देखते हुए नायडू ने इसका फैसला अंसारी पर छोड़ दिया। सरकार से विमर्श करने के बाद अंसारी ने समिति से कहा है कि वह बिल संबंधी अपनी तैयारी पूरी कर ले।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अध्यादेश को कानून में बदलने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने का फैसला किया गया है। लिहाजा इसे सत्र के शुरू होते ही 21 या 22 फरवरी को सदन में पेश कर दिया जाएगा। इसके साथ ही अपराध कानून संशोधन बिल भी पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अध्यादेश के औपचारिक ऐलान के साथ साफ कर दिया था कि जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की कई ऐसी सिफारिशें हैं जिन्हें संशोधन बिल में डाला जाएगा। दांपत्य जीवन में बलात्कार और सैन्य बल विशेषाधिकार कानून संबंधी जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों पर हर संबंधित पक्ष से विचार विमर्श किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए सफर होगा सुरक्षित
परिवहन और पर्यटन मामलों की संसद की स्थायी समिति ने महिलाओं की सुरक्षा के उपायों के लिए बुधवार को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दिल्ली की ओर से कांग्रेस संसद संदीप दीक्षित ने हिस्सा लिया। यह समिति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के साथ देश भर के महानगरों के लिए परिवहन और पर्यटन व्यवस्था में सुधार के उपाय सुझाएगी।
दिल्ली गैंगरेप के बाद बसों और दूसरे परिवहन साधनों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने की कोशिश में स्थायी समिति ने कई नए कदम सुझाए हैं। कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने भी मंगलवार को महिलाओं की सुरक्षा के मकसद के प्रशासनिक बदलाव के निर्देश दिए थे।