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गुरदासपुर: 'क्या पता था कि पापा कभी नहीं लौटेंगे'

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पंजाब के गुरदासपुर में दीनानगर के लोग अब भी चरपमंथी हमले की दहशत से उबर नहीं पाए हैं। इस बीच हमले में मारे गए होमगार्ड के जवान देशराज को अंतिम विदाई दी गई। कतारबद्ध होकर पुलिस और अर्ध-सैनिक बल के जवानों ने बिगुल की ध्वनि पर अपने हथियारों को झुकाया। देशराज दीनानगर हमले के वक्त थाने में अकेले थे।
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दीनानगर थाने से महज़ कुछ ही दूरी पर उनके गाँव जंगला बूआनी में उनके अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। उनकी बेटी अलका सुबकियाँ लेते हुए बताती हैं कि उनके पापा रात की ड्यूटी के लिए गए थे। सुबह वो घर लौटने वाले थे मगर किसी को पता न था कि वो कभी वापस नहीं लौटेंगे।

अलका और परिवार के लोगों तक हमले की खबर पड़ोस की भाभी लेकर आईं जिन्होंने टीवी के चैनलों पर इसे देखा। अलका कहती हैं, "हमले की ख़बर मिलते ही हमने पापा के मोबाइल पर कॉल किया। मगर उनका फ़ोन बजता रहा। हम सब चिंतित हो गए। फिर मेरा छोटा भाई थाने गया। मगर वहां तो जमकर मुठभेड़ चल रही थी। आखिरकार शाम में हमें पापा के मारे जाने की खबर मिली।"
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'पाकिस्तान से आए थे'

इस बीच पंजाब पुलिस का दावा है कि गुरदासपुर के दीनानगर थाने पर हुए चरमपंथी हमले में शामिल तीनों हमलावर पकिस्तान से आए थे। राज्य पुलिस के महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी के अनुसार ये जानकारी ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (जीपीएस) यंत्रों से मिली है जो चरमपंथियों के पास से बरामद किए गए हैं।

सैनी का कहना था कि पहले हमलावरों ने रेल की पटरियों पर बम लगाया, फिर कार का अपहरण किया और तब उन्होंने थाने पर हमला किया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि हमलवार एक हफ्ते पहले से ही गुरदासपुर में मौजूद रहे हों।

वहीं दीनानगर थाने में मौजूद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के विशेषज्ञों ने हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों की जांच की है।

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जारी है जांच

गुरदासपुर के सीनियर एसपी गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच में लगी हुईं हैं कि चरमपंथी दीनानगर कैसे पहुंचे। हालांकि अभी तक मारे गए चरमपंथियों की शिनाख़्त नहीं हो पाई है मगर उनके पास से बरामद जीपीएस यंत्रों की जांच से उनकी आमद के कुछ सबूत मिल रहे हैं।

पंजाब में लंबे समय बाद हुए चरमपंथी हमले ने सबको सकते में डाल दिया है।

घटना से दहशत तो है ही मगर इस हमले से आम लोगों और पुलिस के जवानों के मारे जाने से पूरे सूबे में गम का माहौल है।

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