संसद में एफडीआई के मुद्दे पर सियासी जीत के बाद अब सरकार आर्थिक सुधारों पर फर्राटा भरने के लिए तैयार हो गई है। बसपा और सपा के सहारे से एफडीआई पर विपक्ष के वोटिंग के प्रस्ताव को शिकस्त देकर सरकार अब अगले बजट सत्र की अपनी सियासी राह आसान बनाने की रणनीति बुनने लगी है। माना जा रहा है कि इस हार के बाद अब विपक्ष की ओर से भी सरकार के नंबर की परीक्षा लेने की संभावना कम होगी।
शुक्रवार को वोटिंग के प्रस्ताव पर जीत दर्ज करने के बाद सरकार की राजनीतिक चुनौती कम हो गई है। ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद अल्पमत में नजर आ रही सरकार अब इस जीत से मजबूत नजर आ रही है। लिहाजा, सरकार ने आर्थिक सुधारों की गाड़ी तेज करने का दावा ठोक दिया है।
संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि संसद में आने वाले समय में आर्थिक सुधार से संबंधित और कई बिल पेश करने की सरकार की तैयारी है। सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे में कंपनी मामलों से संबंधित बिल, बीमा में निवेश, पेंशन और वायदा कारोबार से संबंधित बिल लंबित पड़े हैं। ताजा जीत के बाद सरकार अब इन सभी बिलों को संसद में पारित कराने की तैयारी कर रही है।
सरकार का मानना है कि बसपा के खुलकर समर्थन देने से अब उसे बहुमत जुटाने में कोई मुश्किल नहीं होगी। वहीं बसपा के चलते अब सपा की भी सरकार को मदद देने की राजनीतिक मजबूरी होगी। यही नहीं उत्साहित सरकार अब विपक्ष से भी बात करने की तैयारी कर रही है। कमलनाथ ने कहा कि वह आर्थिक सुधारों से संबंधित बिल पर भाजपा नेताओं से भी समर्थन को लेकर बात करने की योजना बना रहे हैं।
सपा-बसपा की सियासत
--9 सदस्यों के साथ सपा ने वॉकआउट कर सरकार को दी संजीवनी।
--15 सदस्यों वाली बसपा ने यूपीए के पक्ष में दिया वोट।
दोबारा हुई मतों की गिनती
राज्यसभा में तब अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब मत विभाजन के बाद सरकार की मांग पर एफडीआई पर हुए मत विभाजन की दोबारा गिनती कराई गई। सरकार का कहना था कि उसे ऐसा आभास होता है कि कुल मतों की संख्या सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या से अधिक रही।
ये भी रहे अनुपस्थित
सचिन तेंदुलकर (मनोनीत) : कोलकाता टेस्ट खेल रहे हैं।
मुरली देवड़ा (कांग्रेस) : अस्वस्थ।
प्यारी मोहन महापात्रा (बीजद) : अनुपस्थित।
रिटेल में एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव
कुल : 244
पक्ष में : 102
विपक्ष में : 123
मतदान नहीं किया : 19