लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी रिटेल में एफडीआई पर बहस के बाद सरकार की जीत लगभग सुनिश्चित हो गई है। संसद के उच्च सदन में संख्याबल में कमजोर पड़ रही सरकार को मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने बृहस्पतिवार को अपने ‘समर्थन का विटामिन’ देकर पैरों पर खड़ा कर दिया है।
वहीं सपा ने भले ही अभी पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सदन के बाहर उसके नेता यही कह रहे हैं कि लोकसभा की तरह वह राज्यसभा में भी ऐन मौके पर ‘वॉकआउट’ करके सरकार को ‘वॉकओवर’ दे देंगे।
ऐसे में सरकार राज्यसभा में होने वाली वोटिंग को लेकर बेफिक्र है। इस दोनों दलों का रुख साफ हो जाने से अब स्पष्ट हो चुका है कि देश में बीते कुछ महीनों से जारी रिटेल में 51 फीसदी तक एफडीआई की सियासी जंग सरकार ने जीत ली है।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में सरकार को विपक्ष के प्रस्ताव गिराने के लिए 123 का आंकड़े की आवश्यकता है क्योंकि सदन में कुल 244 सदस्य हैं। सरकार का दावा है कि हाथी का साथ मिल जाने से उसके पास अब पूरे आंकड़े हैं और सपा के मतदान में हिस्सा नहीं लेने उसकी राह आसान ही होगी। राज्यसभा में बसपा के 15 और सपा के नौ सांसद हैं।
बृहस्पतिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के सरकार के पक्ष में मतदान करने तथा सदन के बाहर सपा महासचिव राम गोपाल यादव ने यह कह कर राज्यसभा में भी सरकार की जीत की पटकथा लगभग लिख दी कि राज्यसभा में भी पार्टी का रुख लोकसभा की तरह होगा।
वैसे यह भी कह रहे हैं कि सपा किसी भी सूरत में सरकार के पक्ष में मतदान नहीं करेगी। बसपा के समर्थन के ऐलान से उत्साहित प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें राज्यसभा में सरकार की जीत का पूरा भरोसा है। बहरहाल, राज्यसभा का बहुमत पक्ष में न होने के बावजूद ऐन वक्त में बसपा के हाथी की सरकार की ओर करवट लेने से बहुमत का सियासी आंकड़ा कांग्रेस के पक्ष में आ गया है।
बसपा के 15 सांसदों के समर्थन से सरकार की स्थिति मजबूत हो गई है। मायावती ने कहा कि उन्होंने पहले राज्यसभा में वॉकआउट करने का फैसला किया था। मगर अब वह विपक्ष (भाजपा) को राजनीतिकरने से रोकने के लिए सरकार को समर्थन देंगी। रिटेल एफडीआई पर राज्यसभा में जारी बहस पर सरकार शुक्रवार को जवाब देगी।
ऐसे जीतेगी सरकार
- राज्यसभा में सांसदों की वर्तमान संख्या: 244
- यूपीए के सदस्य: 87
- एनडीए के सदस्य: 69
- मायावती ने साफ कहा है कि बसपा सरकार को वोट देगी
- सपा (नौ सदस्य) ने पत्ते नहीं खोले, वॉकआउट संभव
- सपा के वॉकआउट पर बहुमत होगा 118 वोटों पर
- यूपीए (87), बसपा (15), मनोनीत (9), निर्दलीय (5) और अन्य (7) मिलाकर कुल 123 सदस्य
- परिणाम : सरकार की जीत
अंगूर खट्टे-खिसियानी बिल्ली
सुषमा स्वराज ने हमारी पार्टी के बारे में लोकसभा में जो कहा हम उसकी घोर निंदा करते हैं। जब भी हम विपक्ष के खिलाफ वोट करते हैं वे सीबीआई की बात उछालते हैं। लोकसभा में उनका प्रस्ताव गिर गया इसलिए वह ऐसी बात कर रहे हैं। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचती है। अंगूर खट्टे होने की बात भी उन पर चरितार्थ होती है।
- मायावती
बसपा-भाजपा नोकझोंक
भाजपा के वैंकेया नायडू के भाषण के दौरान बसपा के साथ उनकी खूब नोकझोंक हुई। नायडू ने अपनी बातों से बसपा और कांग्रेस के नेताओं को काफी नाराज किया। पहले उन्होंने बसपा को कांग्रेस का सहयोगी बताया तो बसपा नेता भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह गलत है।
इस पर नायडू ने कहा कि वह खुश हैं कि बसपा नेता सफाई दे रहे हैं। लेकिन उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे अगर कांग्रेस के सहयोगी नहीं हैं तो फिर उनका कांग्रेस से रिश्ता क्या है? इसके बाद नायडू ने कांग्रेस की एक महिला नेता को ‘बेवकूफ’ कह दिया, जिससे अच्छा खासा हंगामा खड़ा हो गया। हालांकि बाद में उन्होंने नेता से व्यक्तिगत रूप से और सदन से भी माफी मांगी। उन्होंने कहा कि गुस्से में उनके मुंह से यह शब्द निकल गया।
असमर्थ सरकार
सरकार दूसरों की बैसाखी पर टिकी है। वह अपने पैरों पर खड़ी होने में असमर्थ है। लोकसभा में कल यह साबित हो गया। उनके पास बहुमत से 18 सदस्य कम थे। ऐसी सरकार अपने प्रयासों से नहीं चल सकती। जब भी यह होता है, कोई भी सरकार हो उसे समझौते करने पड़ते हैं। कीमत चुकानी पड़ती है।
- अरुण जेटली, राज्यसभा में विपक्ष के नेता
समय आने पर फैसला
फिलहाल हम इतना ही कह सकते हैं कि किसी भी सूरत में सरकार के पक्ष में वोटिंग नही करेंगे। शुक्रवार को जब वोटिंग का समय आएगा तब हमारी पार्टी के उच्च सदन के सदस्य यह तय करेंगे कि क्या करना है।
- नरेश अग्रवाल, सपा नेता