हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने दो टूक कहा है कि सरकार छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों के हित में राज्य के खुदरा बाजार में सीधे विदेशी निवेश (एफडीआई) के कार्यान्वयन को स्वीकृति नहीं देगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा को पत्र लिखकर यह जानकारी दी, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश में एफडीआई पर राज्य सरकार की राय को स्पष्ट किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार छोटे व्यापार से जुड़े हैं। एफडीआई के आने से इन छोटे व्यापारियों को अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आनंद शर्मा के लोकसभा में एफडीआई पर हिमाचल प्रदेश की राय के बारे में दिए गए गुमराह करने वाले वक्तव्य पर आश्चर्य व्यक्त किया।
उनके अनुसार आनंद शर्मा ने संसद में बहस के दौरान एफडीआई की स्वीकृति के लिए संसद की सहमति पाने के लिए यह वक्तव्य दिया, जो तथ्यों के विपरीत है। आनंद शर्मा ने कभी भी प्रदेश सरकार से किसी भी स्तर पर राज्य में एफडीआई के कार्यान्वयन पर सहमति के बारे संपर्क नहीं किया। भाजपा ने हमेशा देश में एफडीआई का विरोध किया है और हिमाचल प्रदेश में भी इसका विरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में किसी भी तरीके से खुदरा बाजार में एफडीआई को स्वीकृत न करने के लिए कृतसंकल्प है।
धूमल ने कहा कि राज्य सरकार ने आनंद शर्मा से कई बार सेब पर आयात शुल्क को बढ़ाने का आग्रह किया, परंतु उन्होंने इसे स्वीकार तक नहीं किया। यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वे विदेशों से आयात होने वाले सेब को निरुत्साहित करने के लिए उस पर भारी शुल्क लगाएं। उन्होंने कहा कि एफडीआई देश के व्यापक हित में नहीं है, क्योंकि यहां अधिकांश जनसंख्या छोटे व्यापार में संलग्न है।