फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एफडीआई पर शक्ति परीक्षण की तैयारी

Fri, 16 Nov 2012 11:15 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर संसद में शक्ति परीक्षण की रणभूमि तैयार हो गई है। विपक्ष ने एफडीआई पर सरकार के पास बहुमत नहीं होने का दावा करते हुए लोकसभा में इस पर वोटिंग प्रस्ताव के तहत चर्चा की ताल ठोककर यूपीए के सामने सियासी अग्निपरीक्षा की चुनौती पेश कर दी है। तो दूसरी तरफ यूपीए के कुनबे को एकजुट करने की मशक्कत कर रही सरकार ने भी कह दिया है कि वह संसद में विपक्ष की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विज्ञापन


सरकार के लिए एफडीआई के मुद्दे पर लेफ्ट और राइट दोनों विपक्षी खेमों के एक होने की चुनौती ज्यादा गहरी नजर आ रही है। भाजपा और क्या माकपा, पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है। लिहाजा सरकार की मशक्कत भी तेज हो गई है। डिनर और लंच के सहारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यूपीए सरकार का समर्थन बल बढ़ा कर विपक्ष की चुनौती से पार पाने की तैयारी में जुट गए हैं।

इस बीच, वामपंथी गठबंधन ने ऐलान कर दिया है कि वह एफडीआई पर वोटिंग के नियमों के तहत चर्चा का प्रस्ताव लाएगा। मुख्य विपक्षी दल भाजपा पहले ही सरकार के खिलाफ संसद में दो-दो हाथ करने का ऐलान कर चुकी है। वहीं ममता बनर्जी भी यूपीए सरकार के खिलाफ सबसे बड़ी मुसीबत बनने के लिए तैयार बैठी हैं। सियासी संकट में सपा और बसपा की चुप्पी भी सरकार की मुश्किलों में इजाफा ही कर रही है।
विज्ञापन


विपक्ष की शक्ति परीक्षण की इस तैयारी को देखते हुए सरकार की ओर से भी इसका मजबूती से मुकाबला करने की ताल ठोकी गई है। अविश्वास प्रस्ताव के सवाल पर दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

वहीं वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विपक्ष को नसीहत दी है कि देश के सामने सिर्फ एफडीआई का मसला नहीं है, बल्कि दूसरे भी कई आर्थिक मुद्दे हैं। इसलिए विपक्ष को संसद चलाने देने में सकारात्मक योगदान करना चाहिए और इसके लिए सरकार उनसे अनुरोध करती है।

आर्थिक सुधारों के एजेंडे पर अमल करने का संकल्प ले चुकी यूपीए सरकार के पास फिलहाल लोकसभा में बहुमत का संकट भले नहीं दिख रहा हो लेकिन एफडीआई के मुद्दे पर उसका सबसे बड़ा घटक दल द्रमुक भी साथ देने की बात पर नखरे दिखा रहा है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री के डिनर में द्रमुक के प्रतिनिधि नजर तो आए, मगर एफडीआई पर उनकी सस्पेंस भरी चुप्पी टूटी नहीं है। सपा और बसपा यूपीए की संकटमोचक बनी हुई हैं पर एफडीआई के मामले में रणनीतिक चुप्पी साधे हैं।

जारी है डिनर डिप्लोमेसी
संसद चलाने और एफडीआई की सियासी चुनौती से उबरने के लिए प्रधानमंत्री ने डिनर डिप्लोमेसी को जारी रखा है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने यूपीए के सभी घटक दलों के नेताओं को रात्रि भोज पर बुलाया।

सपा और बसपा समेत यूपीए के घटक दलों को वह अब तक तीन भोज दे चुके हैं, जबकि शनिवार को भाजपा को भी खाने की टेबल पर साधने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इसलिए मुख्य विपक्षी दल भाजपा के नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को शनिवार को रात्रिभोज पर बुलाया है। प्रधानमंत्री वामपंथी पार्टियों को भी साधने के प्रयासों में जुटे हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें