हैदराबाद धमाकों की जांच में अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की मदद ली जा सकती है। धमाकों की गुत्थी सुलझाने में जुटी एजेंसियों को निश्चित सुराग जरूर मिल रहे हैं। लेकिन इसके पीछे किसी खास संगठन का हाथ होने के बारे में अभी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
वहीं सुरागों के तार जोड़ने की कवायद में एजेंसियों ने सोमवार को लगभग तीस लोगों से पूछताछ की। साथ ही हैदराबाद पुलिस और एनआईए की संयुक्त टीम बिहार और कर्नाटक में भी कुछ संदिग्धों की तलाश में जुटी है। इन धमाकों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे जाने की तकनीकी तैयारी भी चल रही है।
फिलहाल यह जांच हैदराबाद पुलिस के हाथ में है। इसके अलावा हैदराबाद ब्लास्ट के सुराग तलाशने के लिए महाराष्ट्र की विशेष मकोका ने एटीएस को पुणे बम ब्लास्ट के दो आरोपियों फिरोज सैयद और इरफान लांगे से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है।
गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने बताया कि घटना स्थल से कई अहम सुराग मिले हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। मगर फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना मुनासिब नहीं है। गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक शक की सुई भले इंडियन मुजाहिद्दीन की तरफ जा रही है, लेकिन असली खिलाड़ी तक पहुंचने का रास्ता साफ नहीं नजर आ रहा। इसी वजह से पिछले साल हत्थे चढ़े आईएम के लड़कों से पूछताछ की जा रही है।
जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि दिलसुखनगर में दोनों ब्लास्ट में रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इसके लिए टाइम बम का उपयोग किया गया है। इस बीच हैदराबाद पुलिस आयुक्त ने बयान जारी कर कहा है कि सभी शॉपिंग कांप्लेक्स, सिनेमा और होटलों में सीसीटीवी और मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने आदेश दिया कि किसी भी संस्थान के बाहर वाहनों की पार्किंग नहीं होगी।
ली जा सकती है एफबीआई की मदद
आंध्र प्रदेश पुलिस अपनी जांच में अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई की मदद ले सकती है। सीसीटीवी में तीन लोग संदिग्ध तरीके से साइकिल स्टैंड के पास घूमते दिख रहे हैं। मगर बड़ी समस्या सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर स्पष्ट नहीं होना है। सीसीटीवी फुटेज को ज्यादा स्पष्ट करने के लिए उसे एफबीआई के पास भेजा जा सकता है ताकि संदिग्धों की पहचान की जा सके।
पांच में से दो संदिग्ध को पुलिस ने छोड़ा
दिलसुखनगर में हुए बम धमाकों से ठीक पहले स्थानीय लॉज से पांच लोगों ने चेकआउट किया था। इन पांच लोगों में से दो लोगों को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। हालांकि इनमें से एक व्यक्ति ने फर्जी नाम से होटल का कमरा बुक कराया था, जिससे उस पर शक गहरा गया।
लेकिन उसने पुलिस को बताया कि वह अपनी दोस्त के साथ होटल में आया था और अपनी पहचान छिपाना चाहता था। जांच के बाद पुलिस ने पाया कि वह सही बोल रहा है, इसलिए उसे और उसकी दोस्त को छोड़ दिया गया। अन्य तीन व्यक्तियों के बारे अभी कुछ पता नहीं चल सका है।