कड़कड़डूमा स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में उसके पिता को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को दस साल कैद व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी ने वर्ष 2011 में बेटी के दुष्कर्म को अंजाम दिया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टी आर नवल की अदालत ने आरोपी तिलक राज को दोषी करार दिया। अदालत ने पीड़िता व उसके भाई की गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी माना। पीड़िता का भाई मामले का एकमात्र चश्मदीद गवाह था।
पुलिस के मुताबिक तिलक राज ने 25 नवंबर 2011 को अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां ने बेटी के गुम होने की सूचना पुलिस को दी थी। पीड़िता की मां दो दिन उसे लेकर थाने गई।
पीड़िता ने कहा कि जब उसकी मां कोलकाता गई थी तब उसके पिता ने उससे दुष्कर्म किया। इस कारण वह घर से चली गई थी और अपनी सहेली के घर पर रह रही थी। पुलिस ने इस बयान के आधार पर एक दिसंबर 2011 को तिलक राज को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था।
केस की सुनवाई के दौरान तिलक राज ने कहा कि उसे पीड़िता व उसकी मां ने झूठे मामले में फंसाया है क्योंकि वह उनकी गलत हरकतों का विरोध करता था। आरोपी तिलक राज को दोषी मानते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान भरोसे लायक है और साक्ष्यों से यह साबित होता है कि उसने अपनी बेटी से दुष्कर्म किया था।