इंजीनियरिंग की डिग्री ने फसीह मोहम्मद को प्रतिबंधित आतंकी गुट इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) की नजरों में चढ़ा दिया था। पढ़े लिखे और तकनीकी डिग्री वाले लड़कों की तलाश कर रहे आईएम के लोगों ने फसीह को गुजरात दंगों का वीडियो दिखाकर और मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार की कहानियां सुनाकर बहकाया। बिहार के दरभंगा निवासी फसीह पर इन बातों का बड़ा असर हुआ और वह आईएम के लिए काम करने को तैयार हो गया।
खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, इस काम में आतंकी रियाज भटकल के कई गुर्गे शामिल थे। अब तक की जांच के मुताबिक जब कई राज्यों की पुलिस रियाज की तलाश कर रही थी तब वह दिल्ली के ओखला इलाके के एक किराये के कमरे में रह रहा था। यह कमरा फसीह ने ही रियाज को दिलवाया था। फसीह ने पूछताछ में बताया है कि रियाज और उनके लोग उसकी कंस्ट्रक्शन कंपनी के एकाउंट के जरिए विदेश से पैसा मंगवाते थे।
दरअसल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद फसीह ने अपनी एक छोटी सी कंपनी खोली थी। पिछले साल सऊदी अरब जाने से पहले फसीह का मुख्य काम आईएम को लड़कों को पैसा मुहैया करना था। धीरे धीरे रियाज ने उसे आईएम के अलग अलग गुटों के बीच संयोजन करने का काम सौंपा। दरअसल आईएम सुरक्षा एजेंसियों के रडार से बचने के लिए संदेश लेने देने के मकसद से कंप्यूटर या मोबाइल फोन जैसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करती।
सूत्रों के मुताबिक फसीह के सऊदी जाने का इंतजाम आईएम ने ही करवाया था। दरअसल दुबई और खाड़ी के देशों में फसीह के कई रिश्तेदार काम करते हैं। फसीह को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह अलग अलग स्रोत से आईएम के लिए पैसे इकट्ठा करे। सूत्रों ने बताया कि दो साल पहले आईएम के एक मॉड्यूल के खतम हो जाने के बाद रियाज जैसे लोगों ने उसे फिर से खड़ा किया। उन्होंने योजना बनाई कि अब संगठन में पढ़े लिखे लड़कों को भर्ती करना है। इसी सिलसिले में फसीह की तरह कई ऐसे लड़कों को फंदे में लिया गया जिनके पास अच्छी तकनीकी डिग्री थी।