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आलू, प्याज की जमाखोरी अब माना जाएगा अपराध

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सूखे की आशंका के बीच मोदी सरकार ने फलों-सब्जियों की बढ़ती कीमतों से निपटने की कवायद तेज कर दी है। सरकार ने आलू और प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लाने का फैसला किया है। इससे राज्य सरकारों को इनकी भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) तय करने का अधिकार मिल जाएगा और वह जमाखोरों पर कार्रवाई कर सकेंगी। इससे आलू प्याज की जमाखोरी करना अब अपराध होगा।
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वहीं, सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए न्यूनतम निर्यात मूल्य 300 से बढ़ाकर 500 डॉलर प्रति टन कर दिया है। केंद्र सरकार ने महंगाई से निपटने के लिए राज्य सरकारों का जमाखोरों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल महंगाई को लेकर बुधवार को हुई बैठक में प्याज और आलू को अब एपीएमसी एक्ट से बाहर करने संबंधी फैसला किया गया है।

इस फैसले के बाद बाद देश भर के किसान आलू-प्याज कहीं भी बेच सकेंगे। केंद्रीय न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि महंगाई रोकने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। महंगाई को रोकने के लिए सिर्फ जमाखोरों पर लगाम लगाने की जरूरत है।
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जमाखोरों के खिलाफ होगी कार्रवाई

अब किसानों को मंडी से बंधे रहने की जरूरत नहीं होगी। राज्यों के लिए प्याज और आलू का स्टॉक तय होगा। राज्य अपने लिए स्टॉक लिमिट तय करें। राज्य सरकारें जमाखोरों पर कार्रवाई करें।

राज्य सरकारों का ये दायित्व है कि वे प्रभावी और कठोर कार्रवाई करें। राज्यों को अतिरिक्त चावल दिया जाएगा। 50 लाख टन अतिरिक्त चावल जारी रहेगा। इस बाबत अधिसूचना लागू की जाएगी। यह अधिसूचना एक साल के लिए लागू होगी।
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