सहारनपुर के रायवाला स्थित एक सोसाइटी को सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी करार दिया है। इसमें वादी को पांच करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने का भी आदेश किया है। इस पूरे मामले में मंडलायुक्त, डीएम, एसएसपी, एसडीए वीसी और रजिस्ट्रार को आदेश को अमल में लाने को कहा गया है। रजिस्ट्रार को तत्काल इस सोसाइटी को अपंजीकृत करने और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को निर्माण कार्य रोकने, संपत्ति पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के सरकारी दफ्तरों में पहुंचने के बाद हड़कंप मच गया है।
रायवाला के शास्त्री मार्केट में एक जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में कमलेश पत्नी शिवराज ने राज्य सरकार के खिलाफ सर्वोच्च
न्यायालय में वाद दायर किया। रायवाला में स्थित हरनाम दास लोटिया मंदिर की जमीन के अधिकार को लेकर सोसाइटी और एक परिवार में विवाद है। खसरा नंबर
669, खेवट नंबर 576 पर बनी दुकानें और अन्य प्लाट की देखरेख अब तक श्री मंदिर हरनाम दास लोटिया सोसाइटी करती है। सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार
के खिलाफ दायर वाद में फैसला कमलेश के पक्ष में आया है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने श्री मंदिर हरनाम दास लोटिया सोसाइटी को फर्जी करार दिया है।
सहायक रजिस्ट्रार को इस सोसाइटी को अंपजीकृत करने का आदेश दिया है। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को आदेश दिया गया है कि वहां होने वाले निर्माण को रोक दिया जाए। इसके अलावा संपत्ति पर कब्जा दिलाने को भी कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने वादी कमलेश पत्नी शिवराज को जमीन के बेसिक स्ट्रक्चर को हटाने, संपत्ति के उपयोग, चोट, घाटा, और मानसिक परेशानियों के चलते पांच करोड़ रुपये मुआवजा देने का भी फैसला किया गया है। इसमें आदेश को अमल में लाने को मंडलायुक्त, डीएम, एसएसपी, एसडीए वीसी, रजिस्ट्रार सोसाइटी को कहा गया है।