हाथरस में साले के चक्कर में एक जीजा फर्जी आईएएस बन गया। वह अपने साले को नकल कराने के लिए नीली बत्ती लगी कार से पूरे रुतबे के साथ आया, लेकिन अधिकारियों ने शक होने पर उसे पकड़ लिया। उससे डीएम और एसपी ने पूछताछ की। तब उसके फर्जी होने का खुलासा हुआ। उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
शनिवार को एसपी दीपिका तिवारी के पास फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को वर्ष 2005 बैच का आईएएस रूपेश कुमार बताया। उसने एसपी से पुलिस सुरक्षा मांगी। यह भी कहा कि वह आगरा से इस समय हाथरस जिले में आ रहा है। पुलिस सुरक्षा के लिए जब एसपी के मोबाइल पर कई बार फोन आए तो एसपी ने शक होने पर इस बारे में डीएम से बात की। एसपी ने यह भी बताया कि प्रोटेक्शन मांगने वाला व्यक्ति खुद को 2005 का आईएएस बता रहा है।
इस पर डीएम का भी माथा ठनका, क्योंकि वह खुद वर्ष 2005 के आईएएस हैं। इस व्यक्ति को गिरफ्त में लेने के लिए पुलिस और प्रशासन ने जाल बिछाया। उसके लिए बाकायदा एसडीएम सादाबाद और सीओ सादाबाद को इस तरह से भेजा गया कि जैसे उसकी आईएएस के रूप में अगवानी की जा रही है। खुद को आईएएस बताने वाला यह शख्स नीली बत्ती लगी स्विफ्ट गाड़ी में बैठा था। आगरा रोड सीमा पर एसडीएम और सीओ मय फोर्स के पहुंच गए। यह लोग उसे अपने साथ थाना चंदपा ले आए।