तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू गोपनीय तरीके से भारत सरकार की ओर से नेताजी की विधवा को आर्थिक मदद देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बाकायदा वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से लिखित सलाह भी मांगी थी।
मंत्रालय सहमत भी हुआ लेकिन नेताजी की विधवा ने राशि नहीं ली। बाद में कांग्रेस ने ट्रस्ट बनाकर वर्ष 1965 तक नेताजी की पुत्री अनीता बोस को छह हजार रुपये सालाना मदद दी।
नेताजी से जुड़ी फाइलों में दर्ज दस्तावेज बताते हैं कि नेहरू ने 12 जून 1952 को वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से सलाह मांगी थी। इसमें उन्होंने लिखा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विधवा को विएना में 100 पाउंड की मदद देना कैसे संभव हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने इस पर 26 जून 1952 को सहमति जताई। इस सहमति पर बी एन कौल के दस्तखत हैं।