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बुरी तरह घायल होने के बावजूद शांत थे नेताजी

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नेताजी के मौत के रहस्य से बेशक पर्दा नहीं उठा है लेकिन हवाई जहाज दुर्घटना से हुई उनकी मौत को सत्य माना जाए तो बुरी तरह से घायल नेताजी के होठों पर तनिक भी शिकन नहीं थी। बुरी तरह घायल होने के बावजूद भी वह व्याकुल नहीं थे। बल्कि शांत भाव से अपने सहयोगियों की चिंता कर रहे थे।
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मरने से पहले उन्होंने यही कहा कि आई वांट टू स्लीप। उनकी मौत के रहस्य से पर्दा हटाने के लिए बनी पहली जांच कमेटी के सामने मई 1956 में बयान दर्ज कराते हुए डॉक्टर जुईची नाकामूरा ने कहा है कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना के वजह से हुई। उन्होंने कहा है कि 18 अगस्त 1945 की घटना है।

जब शाम 5:30 बजे एक सैन्य अधिकारी उनके घर पहुंचा और उनसे अस्पताल चलने को कहा। वहां पहुंचकर उन्होंने जो दृश्य देखा उसे उन्होंने जांच आयोग के सामने रखा है।
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वहां मौजूद सभी लोग थे हतप्रभ

नाकामूरा के अनुसार अंत समय में भी नेताजी का स्वभाव सबके लिए चौंकाने वाला रहा। बुरी तरह से घायल और चोटिल होने के बावजूद भी नेताजी के होठों पर किसी की शिकायत, दर्द या पीड़ा की शिकन नहीं थी।

जबकि शेष घायल दर्द से कराहते और चिल्लाते हुए डॉक्टर से मदद की गुहार लगा रहे थे। उल्टे उन्होंने बगल के बिस्तर पर पडे़ कर्नल रहमान से कहा कि मेरे कुछ और लोग आ रहे हैं। उनका ख्याल रखाना। इसे देख सभी हतप्रभ थे। उन्होंने बताया है कि नेताजी के मुंह से अंतिम शब्द यही निकला कि मैं सोना चाहता हूं।

यह करीब 9 से 9:30 बजे रात का समय होगा। इससे पहले उन्होंने हल्के स्वर में कहा कि उन्हें लग रहा है कि उनके सिर से खून निकलकर कमर के बगल से रिस रहा है।
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