बेटी दमन सिंह की किताब से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जिंदगी के कई अनजाने पहलू सार्वजनिक हो रहे हैं। किताब के अनुसार, 1991 में जिस वक्त उन्हें देश का वित्त मंत्री बनाए जाने की जानकारी दी गई उस समय वह सो रहे थे। पीटीआई के मुताबिक मनमोहन सिंह के लिए ही यह फैसला उनके लिए अप्रत्याशित था। साथ ही वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने मजाक में कहा था कि यदि चीजें सही नहीं हुई तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।
मनमोहन सिंह की मदद की राव ने
दमन ने अपनी किताब ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल-मनमोहन एंड गुरुशरण’ में लिखा है कि जब प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीसी एलेक्जेंडर का फोन आया उस वक्त मनमोहन सिंह सो रहे थे। एलेक्जेंडर ने फोन पर उन्हें देश का वित्त मंत्री नियुक्त किए जाने की जानकारी दी। इस फैसले के बारे में मनमोहन का कहना है कि यह उनके लिए अप्रत्याशित था।
मनमोहन सिंह ने अपनी बेटी को बताया कि राव ने उदारीकरण और इस दिशा में आगे बढ़ने में उनकी पूरी मदद की। उनका कहना है कि उदारीकरण का पहला विचार राव का था, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया और लागू किया। पूर्व पीएम का कहना है कि राव मजाक में कहा करते थे कि जो बातें वह कह रहे हैं अगर वे सही साबित नहीं हुई तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।
आपातकाल लगाने से आश्चर्यचकित रह गए थे
1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए दमन ने किताब में लिखा है कि इससे मनमोहन सिंह भी आश्चर्यचकित रह गए थे। उनके अनुसार, देश में अशांति का माहौल था लेकिन किसी को भी इंदिरा गांधी से इस तरह के कदम की अपेक्षा नहीं थी।
आपातकाल के बाद मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी तो कई अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया लेकिन सिंह अपने पद पर बरकरार रहे। शुरुआत में देसाई सिंह के प्रति काफी सख्त थे।
पूर्व पीएम के अनुसार, जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने उनसे कहा कि आप पहली की सरकार के काफी करीब थे। इसलिए प्रारंभ में वह काफी सख्ती से पेश आए लेकिन कुछ समय बाद उनका रवैया सामान्य हो गया।