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'ममता ने मेरी जिंदगी मुश्किल बना दी'

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'मैं पिछले तीन दशकों से महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर ही लिखती रही हूं, मगर शेख हसीना, बेगम खालिदा जिया और ममता बनर्जी ने मेरी जिंदगी मुश्किल बना दी।'
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बांग्लादेश की निर्वासित विवादित लेखिका तसलीमा नसरीन बेहद आहत हैं। उन्हें आशंका है कि उनकी नवीनतम किताब ‘निशिद्धो (निषिद्ध)’ आगामी कोलकाता पुस्तक मेले से बाहर और प्रतिबंधित कर दी जाएगी।

तसलीमा ने सोमवार को कहा कि ऐसे प्रतिबंध वास्तव में एक लेखक की ‘वास्तविक मौत’ है।

देश में होनी चाहिए ‘आम औरत पार्टी’

इससे पहले 2012 में उनकी किताब ‘निर्बासन’ पुस्तक मेले से बाहर कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि देश में ‘आम औरत पार्टी’ होनी चाहिए जो महिलाओं के मुद्दों के लिए लडे़।

तसलीमा का कहना है पश्चिम बंगाल में कोई बदलाव नहीं ला सकता। फिलहाल उन्हें ‘सिटी ऑफ ज्वॉय (कोलकाता)’ में लौटने की कोई उम्मीद नहीं नजर आती है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के हालात बांग्लादेश जैसे ही हैं।

मेरी किताबों पर पाबंदी लगाती है बंगाल सरकार

तस्लीमा ने कहा कि यह कितना अजीब लगता है कि मैं पिछले तीन दशकों से महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर ही लिखती रही हूं, मगर शेख हसीना, बेगम खालिदा जिया और ममता बनर्जी ने मेरी जिंदगी मुश्किल बना दी।

बंगाल सरकार मुझे वहां जाने पर रोक लगाने के अलावा जिन टीवी नाटकों की मैंने पटकथा लिखी है उस पर रोक लगाने व मेरी किताबों पर पाबंदी लगाती रही है।
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मैं कोलकाता को बहुत याद करती हूं

उन्होंने कहा कि यह सरकार मुझे कोलकाता पुस्तक मेले में हिस्सा लेने से रोकती रही है। ऐसा माकपा के शासन काल में भी होता था। जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो मुझे लगा कि हालात बदल जाएंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ।

लेखिका ने कहा कि उनकी किताब ‘निशिद्धो’ कोलकाता बुक फेयर में प्रदर्शित की गई है, मगर उन्हें लगता नहीं है कि यह मेले के आखिरी दिन यानी नौ फरवरी तक बरकरार रह पाएगी।

मैं कोलकाता को बहुत याद करती हूं, क्योंकि मेरा उससे सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।
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