महिलाओं के खिलाफ देश भर में हो रहे अपराध की घटनाओं को दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए केंद्र से पूछा है कि 18 साल से कम उम्र वालों को फेसबुक सहित सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अकाउंट खोलने की अनुमति कैसे दी गई?
कोर्ट ने भाजपा के पूर्व नेता गोविंदाचार्य की याचिका पर फेसबुक और गूगल को भी नोटिस भेज जवाब तलब किया है।
जस्टिस बीडी अहमद व विभू बाखरू की बेंच ने सरकार के वकील सुमित पुष्करणा से 10 दिन में हलफनामा पेश करने को कहा।
बेंच के सामने गोविंदाचार्य के वकील विराग गुप्ता ने दलील दी कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अकाउंट खोलना गैरकानूनी है।
उन्होंने बताया कि पहचान का कोई तरीका न होने के कारण दुनियाभर में फेसबुक के आठ करोड़ यूजर्स फर्जी हैं।
खुद फेसबुक इस बात को अमेरिकी अधिकारियों के सामने मान चुकी है। भारत सरकार इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रही है।
सोशल नेटवर्क पर पोस्ट की जा रही सामग्री को लेकर पहले भी विवाद उठ चुका है और मामला अदालत में है।
याचिका में कहा गया है कि गंभीर अपराध और सेक्स अपराध में दोषी लोगों का सोशल साइट पर प्रवेश रोका जाए। फेसबुक पर 13 वर्ष के बच्चों का खाता खोलने से रोका जाए।
भारत सरकार के नियमों के मुताबिक मोबाइल कनेक्शन लेने से पहले उपभोक्ता की जांच जरूरी है, लेकिन सोशल साइट पर खाता खोलने से पहले कोई जांच नहीं होती।
एक सर्वे के अनुसार 13 साल की उम्र अधिकांश बच्चे सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट खोल लेते हैं और इनमें से 57 फीसदी बच्चों की मदद उनके पैरेंटस ही करते हैं।
जो बच्चे सोशल नेटवर्किंगसाइट्स पर संदेश भेजने और इंटरनेट पर ज्यादा समय खर्च करते हैं वे अपनी कक्षा में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन भी नहीं कर पाते।
सात से 12 साल उम्र के दो तिहाई बच्चे सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल अपने दोस्तों की वजह से करते हैं।
सोशल नेटवर्किंग साइटस पर ज़्यादा वक़्त बितानेवाले बच्चे कई बार साइबर बुलीइंग के शिकार भी होते हैं।