सुप्रीम कोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम की उस याचिका को आज खारिज कर दिया जिसमें उसके खिलाफ चल रहे सभी मुकदमों को निरस्त करने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुर्गताल से उसके प्रत्यर्पण को वैध ठहराते हुए मुकदमा चलते रहने का आदेश दिया।
प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नौ जुलाई को अबु सलेम की अपील पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि सीबीआई की दलीलों पर विचार के बाद ही कोई आदेश दिया जाएगा। सलेम इस समय मुंबई की आर्थर जेल में बंद हैं।
पुर्तगाल ने माना शर्त्तों का उल्लंघन
सलेम और उसकी महिला मित्र अभिनेत्री मोनिका बेदी को तीन साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पुर्तगाल ने 11 नवंबर, 2005 को भारत को सौंपा था।
पुर्तगाल ने कुछ शर्तों पर प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। प्रत्यर्पण की शर्त के अनुसार सलेम को दोषी पाये जाने पर न तो मौत की सजा दी जायेगी और न ही उसे 25 साल से अधिक हिरासत में रखा जाएगा।
अबु सलेम के प्रत्यर्पण के समय भारत ने पुर्तगाल को इन शर्तों के पालन को आश्वासन दिया था।
पुर्तगाल की सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार की तरफ से शर्तों के उल्लंघन के चलते प्रत्यर्पण रद्द करने का निर्णय दिया था। इस आदेश के बाद अबु ने टाडा अदालत में याचिका दायर करके इस मुकदमे को बंद करने का अनुरोध किया था।
टाडा अदालत ने अबु की याचिका खारिज कर दी थी।
नहीं चलेगा टाडा के तहत मुकदमा
अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने अदालत में कहा कि सरकार पुर्तगाल की अदालत को दिये गये आश्वासन का पालन करने के लिए कृतसंकल्प है।
उन्होंने कहा कि निचली अदालत में इस गैंगस्टर के खिलाफ लगाये गये अतिरिक्त अभियोग हटाने की न्यायालय से अनुमति मांगी गई थी। सीबीआई टाडा कानून की धारा 5 और 6 तथा विस्फोट पदार्थ कानून की धारा 4 (बी) और 5 के तहत तैयार आरोप वापस लेना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अर्जी को मंजूरी दे दी है। इन धाराओं के तहत फांसी तक की सजा हो सकती थी। अबू सलेम के खिलाफ दूसरे मामलों पर केस चलेंगे।