मोदी सरकार के पहले बजट में 80 हजार प्राइमरी स्कूल खोलने और 75 हजार जूनियर हाईस्कूल को अपग्रेड करने की बात की गई है, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक कहां से आएंगे? वित्तमंत्री अरुण जेटली के पहले पूर्ण बजट पर ये प्रतिक्रिया शिक्षाविद प्रोफेसर आरेक गुप्ता ने दी है।
अमर उजाला डॉट कॉम से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि बजट में एक आईआईटी और पांच एम्स खोलने की बात की गई है। लेकिन जो सामान्य कॉलेज हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पारंपरिक कोर्सों के लिए पैसा नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि आईआईटी और एम्स खोलने के फैसला अच्छा है, लेकिन इनसे निकले लोग प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में तो पढ़ाएंगे नहीं। आईआईटी और एम्स से निकलने के बाद व्यक्ति कॉर्पोरेट सेक्टर में ही जाएगा, हालांकि वहां नौकरियां होंगी तो ही उसे भी लाभ होगा।
आरके गुप्ता ने कहा कि आईआईटी और एम्स खुलने में लंबा वक्त भी लगेगा और इसका फायदा मौजूदा विद्यार्थियों को नहीं मिल पाएगा। मौजूदा विद्यार्थी उसी कॉलेज में एडमिशन ले पाएंगे, जो इस समय हैं। जबकि बजट में उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
आरके गुप्ता ने कहा कि मोदी सरकार के पहले बजट में स्किल डेवलपमेंट में भी कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है।
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