छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की रैली में लाल किला और अब रेवाड़ी में मंच की पृष्ठभूमि में संसद भवन।
ऐसा लगता है कि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव से पहले ही अपनी हर हसरत पूरी कर लेना चाहते हैं।
मोदी के नेतृत्व में भाजपा चुनाव प्रचार की नई परिपाटी तैयार कर रही है। उनके समर्थक उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखते हैं, संभवतः इसलिए उनके कार्यक्रमों की मंच सज्जा और भाषण ऐसे रखे जा रहा हैं, जिससे वे प्रधानमंत्री के विकल्प के रूप में दिखें।
भाजपा की लोकसभा चुनाव प्रचार की ये नई रणनीति है। हालांकि कांग्रेस इस रणनीति को मोदी की अधूरी ख्वाहिशों से जोड़ कर देखती है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी मोदी की चुटकी लेते हुए गालिब का शेर याद करते हैं-हजारों ख्वाहिशें ऐसीं, हर ख्वाहिश पर दम निकलें।
'संयोग' भी नहीं भूल रहे मोदी
नरेंद्र मोदी की रैलियों और उनसे जुड़ी घोषणाओं में संयोगों को भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। भाजपा की पहले पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए 13 का अंक महत्वपूर्ण था, इसलिए मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में 13 अंक का ध्यान रखा गया।
उन्हें 13 सितंबंर, 2013 को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के बाद मोदी की पहली रैली रेवाड़ी में रखी गई।
14 साल पहले 1999 में भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए अटल बिहारी वाजपेयी को उम्मीदवार घोषित किया था, तो उन्होंने भी अपनी पहली रैली रेवाड़ी में ही संबोधित की थी।
1999 की वह रैली भी पूर्व सैनिकों द्वारा आयोजित की गई थी। रविवार को हुई रैली भी पूर्व सैनिकों द्वारा आयोजित की गई।
लालनपुर से दे चुके हैं चुनौती
नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वतंत्रता दिवस के भाषण को चुनौती भी दे चुके हैं। बीते 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर मोदी ने कहा था, 'स्वतंत्रता दिवस पर देश लाल किले पर होने वाली प्रधानमंत्री के भाषण और लाललपुर में होने वाले मेरे भाषण की तुलना करेगा।'
उन्होंने कहा था कि वहां समस्याएं गिनाई जाएंगी, यहां उनके जवाब दिए जाएंगे।
इस कुछ दिनों बाद ही छत्तीसगढ़ में नरेंद्र मोदी ने लाल किले जैसे एक मंच रैली को संबोधित किया था। बताया जाता है कि इस नकली लाल किले के निर्माण में दो करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।