एक पूर्व भारतीय जासूस का मानना है कि सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की पूर्वनियोजित योजना के तहत मारा गया है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ पाक की एक जेल में कुछ वक्त साथ में बिता चुके भारतीय जासूस महबूब इलाही ने कहा कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि सरबजीत पर किया गया हमला पूर्वनियोजित था।
इलाही ने कहा कि इस हमले के पीछे आईएसआई और जेल अधिकारियों का पूरा हाथ है। अब जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है तो दो कैदियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
इलाही 1986-87 के दौरान जिया-उल-हक के कार्यकाल में मौजूदा राष्ट्रपति जरदारी के साथ कराची की सेंट्रल जेल में कुछ महीने बिता चुके हैं।
इलाही ने दावा किया कि 1977 में जेल और आईएसआई के अधिकारियों ने उन्हें एक ब्लैंक चैक देकर लाहौर जेल में बंद पाकिस्तान के एक शीर्ष नेता की हत्या करने को कहा था।
उन्होंने कहा था कि इस काम के बदले तुम इस ब्लैंक चैक में अपनी मनमाफिक रकम भर सकते हो।
इलाही ने कहा कि बिना जेल प्रशासन की मर्जी के सरबजीत पर कैदियों द्वारा हमला किया जाना असंभव है।
उन्होंने कहा कि मैं खुद 20 साल पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में रह चुका हूं और मुझे मालूम है कि पाकिस्तानी कैदी कभी भारतीय या बांग्लादेशी कैदियों पर हमला नहीं करते, क्योंकि उन्हें अलग-अलग बैरकों में रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि मृत्यु दंड पाने वाले और विदेशी मूल के कैदियों को बाकी कैदियों से अलग रखा जाता है और उन्हें उनकी बैरक से बाहर लाते वक्त हथकड़ी पहना दी जाती है।
लिहाजा, यह कैसे संभव है कि कोई उस पर हमला कर दे। इलाही जासूसी के आरोप में 1977 से 1996 के बीच पाकिस्तान की जेल में बंद रह चुके हैं।