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कहीं अधिक गहरे जख्म छोड़ गई दिल्ली गैंगरेप पीड़िता

Sat, 29 Dec 2012 12:19 PM IST
अनूप वाजपेयी/नई दिल्ली
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गैंगरेप पीड़िता लड़की के जिस्म पर जितने जख्म थे, उससे कहीं अधिक गहरे जख्म वह हमारे सामाजिक और कानून व्यवस्था पर छोड़ कर गई है। जिन्हें भरने में न जाने कितना समय और लगेगा। आंदोलनों का इतिहास संजोए देश में पहला मौका था, जब बिना किसी नेतृत्व और बैनर के लोग सड़कों पर उतरे। 17 दिसंबर से लड़की के सिंगापुर जाने के बाद भी उसके समर्थन में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं।
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हर भारतीय को झकझोरा
दस दिनों तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में गुमसुम पड़ी एक लड़की को न्याय दिलाने के लिए लोग पुलिस की लाठियां, आंसू गैस के गोले और दिल्ली की ठंड में पानी की बौछारों के आगे बेबस नहीं दिखे। जिस घिनौने ढंग से इस घटना को अंजाम दिया गया था उसने न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को भी झकझोरा और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने कमेंट देने पर मजबूर किया। इस घटना पर लोगों के जबरदस्त विरोध के चलते ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्र के नाम सम्बोधन देना पड़ा।

राष्ट्रपति भवन तक लगाई गुहार
पहली बार आंदोलनकारी बिना की झिझक राष्ट्रपति भवन तक अपनी गुहार लेकर जा पहुंचे। संसद के अंदर महिला सांसदों ने भी एकजुटता दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया। देश की सामरिक ताकत की झांकी दिखाने वाले इंडिया गेट पर शायद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में युवाओं ने शक्ति दिखाई। अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े छात्र संगठन कंधे से कंधा मिलाकर नारेबाजी करते दिखे।
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दिल्ली में दुष्कर्म के मामलों और आंकड़ों में अभी भी कमी नहीं आई है। मुनिरका से बस में सवार हुई एक बहादुर लड़की जिस तरह अस्पताल में मौत से लड़ रही थी। उसी के बहाने देश भर की महिलाएं अपनी सुरक्षा की ढाल, कड़े कानून, और सामाजिक सम्मान के लिए लड़ रही थीं। बहादुर लड़की अपनी लड़ाई हार गई लेकिन नहीं लगता कि बिना किसी नाम और पहचान के उसके समर्थन में सड़कों पर उतरीं महिलाएं व लड़कियां इस लड़ाई को बीच में छोड़ेंगी।
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