फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोर्ट में अंग्रेजी अनुवाद की बाध्यता से छुट्टी

Wed, 17 Oct 2012 01:53 PM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिकाओं और जवाब का अंग्रेजी अनुवाद भी दाखिल करने की अनिवार्यता का आदेश एकल न्यायपीठ ने समाप्त कर दिया है। राजेश्वरी बनाम राज्य मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एपी साही ने कहा कि हिंदी भाषा में दाखिल होने वाले संलग्नकों का अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए याची को बाध्य नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय और राज्यपाल की अधिसूचना भी है, जिसका पालन होना चाहिए। इसमें अंग्रेजी के साथ ही हिंदी की देवनागरी लिपि में याचिकाएं दाखिल करने की छूट दी गई है।
विज्ञापन


एकल न्यायपीठ ने गैर हिंदी भाषी न्यायाधीशों की कठिनाइयों के मद्देनजर कहा है कि ऐसी आवश्यकता होने पर रजिस्ट्री दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करा लें। न्यायालय ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता कार्यालय को भी परिपत्र का पालन करने की छूट दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ताओं की खिंचाई करते हुए भी कोर्ट ने कहा कि एकल न्यायपीठ और खंडपीठ द्वारा इस संबंध में आदेश जारी करते समय उनको सही तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई कि राज्यपाल ने हाईकोर्ट की भाषा हिंदी कर दी है।

न्यायालय के समक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वीपी श्रीवास्तव, अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र ने कहा कि प्रदेश की भाषा हिंदी है। राज्य सरकार की अधिसूचना को देखते हुए वकीलों को अंग्रेजी अनुवाद दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन


निर्णय का स्वागत
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र ने एकल न्यायपीठ द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद दाखिल करने की बाध्यता समाप्त करने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा कोई भी राष्ट्रवादी व्यक्ति और हाईकोर्ट का अधिवक्ता ऐसी बाध्यता को सहन नहीं कर सकता है। अधिकांश लोग हिंदी को समझ सकते हैं और उसमें काम भी कर सकते हैं। हाईकोर्ट के अन्य अधिवक्ताओं ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें