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सिस्टम से लड़ते बुजुर्ग की यह कहानी आपको झकझोर देगी

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रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने पुत्र मुकुल गुप्ता को न्याय दिलाने के लिए 14 साल से संघर्ष कर रहे थे। बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने की तमन्ना उनके दिल में ही रह गई। सिस्टम के साथ न देने की कसक भी गुप्ता के दिल में थी।
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दोनों बेटियां मायके में रह रही थीं। बेटे भी उनके साथ नहीं थे। एक बेटा दिल्ली और एक बरेली में रह रहा है। गुप्ता दंपति अकेले इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में जुटे थे।

दरअसल, 30 जून 2007 को बरेली के थाना फतेहगंज पूर्वी में विजेंद्र गुप्ता के युवा पुत्र मुकुल गुप्ता को पुलिस ने बैंक लुटेरा बताकर एनकाउंटर में मार दिया था। मुकुल एक दवा कंपनी में काम करते थे। इस मुठभेड़ के खिलाफ विजेंद्र गुप्ता ने मोर्चा खोला। वह हाईकोर्ट तक गए।
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फरवरी 2010 में हाईकोर्ट के आदेश पर मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। इसमें ट्रेनी आईपीएस जेआर गौड़ (वर्तमान में अलीगढ़ के एसएसपी), विकास सक्सेना (तत्कालीन एसओ, सीबीगंज बरेली), एसआई मूला सिंह, देवेंद्र सिंह, आरके गुप्ता, कांस्टेबल गौरी शंकर, दिनेश चंद्र, अनिल कुमार, कालीचरन (अब मृत), रवि प्रकाश और वीरेंद्र शर्मा आरोपी बनाए गए।

पूरी नहीं हुई बेटे के कातिलों को सजा दिलाने की तमन्ना

अगस्त 2014 में सीबीआई ने जांच पूरी करके चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। चार्जशीट में आईपीएस जेआर गौड़ का नाम नहीं था। इससे गुप्ता काफी क्षुब्ध थे। यूपी सरकार ने आईपीएस पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी तो गुप्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली।

कोर्ट ने आईपीएस गौड़ के खिलाफ केस चलाने के आदेश दिए। आदेश का पालन न होने पर गुप्ता ने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। इस याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

बेटे की हत्या में शामिल पुलिस वालों को वह सजा दिलाने को लड़ रहे थे। अवमानना याचिका पर जल्द फैसला आने वाला था। इससे पहले गुप्ता दंपति का कत्ल हो गया। बेटे के कातिलों को सजा दिलाने की तमन्ना उनके दिल में ही रह गई।
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कोई करीबी ही है कातिल

पीडब्लूडी से रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सन्नो की निर्मम हत्या में किसी करीबी का ही हाथ है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं। हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने के बाद इत्मीनान से पानी भरे एक टब में हाथ धोए। अब तक की पुलिस तफ्तीश में इतना तो साफ है कि हत्या लूट या चोरी के इरादे से नहीं की गई। घटनास्थल का मौका मुआयना करने के बाद आईजी विजय मीणा ने भी यह बात मानी है।

रिटायर्ड इंजीनियर वीके गुप्ता को मोहल्ले के लोगों ने पांच अप्रैल को सुबह आखिरी बार देखा था। पति-पत्नी एकांकी जीवन जी रहे थे। आस-पड़ोस के लोगों से उनका ज्यादा सरोकार नहीं था। आस-पास के लोगों की मानें तो उनके घर के दोनों दरवाजे भी बंद ही रहते थे। गुप्ता दंपति घर की पहली मंजिल पर रहते थे। मकान काफी बड़ा है। उन्होंने इसे किराए पर डाक विभाग को दे दिया था। डाक विभाग ही मकान में रंगाई-पुताई करा रहा है।

हत्यारे कौन हैं यह तो जांच का विषय है, लेकिन जिस तरह से दिन में हत्यारों ने बेखौफ होकर सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया वह इशारा करीबियों की ओर कर रहा है। जिस रसोई में गुप्ता दंपति के शव पड़ थे, वहां गैस का चूल्हा दीवार से टिका हुआ रखा है।

घर में गृहस्थी के सामान की एक लिस्ट भी मिली है। आस-पास खून के छींटे पड़े थे। आंगन में रखे टब का पानी लाल था। इसमें हत्यारों ने हाथ धोए थे। हत्यारे घर की भौगोलिक स्थिति से भी पूरी तरह वाकिफ थे। घटना को उन्होंने पेशेवर तरीके से अंजाम दिया। घर के किसी सामान को हाथ नहीं लगाया। इस हत्याकांड का खुलासा पुलिस को चुनौती से कम नहीं होगा।
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