जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरागांधी के खिलाफ फैसला सुनाया और समाचार एजेंसी पीटीआई ने पूरे फैसले को जस का तस जारी कर दिया। यानी शब्दों और सूचना में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया, जिससे इंदिरागांधी के खिलाफ फैसले की खबर आम जनता इसे पढ़ने के बाद फैसले की व्याख्या सत्ता के मुताबिक करे।
पूरे देश को खबर सुना दी कि, श्रीमती गांधी को जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 [ 7 ] के तहत भ्रष्ट साधन अपनाने के लिये दोषी करार दिया गया और प्रधानमंत्री को छह वर्षों के लिये मताधिकार से वंचित किया गया।
संजय गांधी ने सूचना प्रसारण मंत्री इंद्र कुमार गुजराल को बुलाकर खूब डपटा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बताने के तरीके बदले भी तो जा सकते थे।
पहली बार समाचार एजेंसी पीटीआई-यूएनआई को चेताया गया कि बिना जानकारी इस तरह से खबरें जारी नहीं करनी है। बाद में गुजराल को रूस में भारतीय राजदूत के तौर पर भेज दिया गया।
गुजराल आपातकाल से खुश नहीं थे। संजय गांधी से हुई कहा-सुनी के बाद उन्होंने आखिरकार कांग्रेस छोड़ दी और जनता पार्टी का दामन पकड़ लिया।