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अंतिम दौर के तीन दिनों में काशी की सड़कों पर घमासान

Sun, 11 May 2014 07:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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पूर्वांचल की सीटों के लिए रणनीतिक केंद्र बन चुकी काशी में अंतिम दौर में जमकर घमासान हुआ। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के आठ मई को हुए जबरदस्त रोड शो के बाद पार्टियों ने अपनी प्रचार रणनीति बदलते हुए मतदाताओं को अपनी ताकत दिखाई।
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प्रचार खत्म होने के अंतिम तीन दिनों में मोदी के अतिरिक्त आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, बसपा सुप्रीमो मायावती, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सूबे के मुखिया अखिलेश यादव काशी के चुनावी रण में उतर आए और विरोधियों पर निशाना साधा।

वहीं काशी की उत्सव प्रिय जनता सभी रैलियों में जबरदस्त भीड़ के रूप में शामिल हुई। अब पार्टियों के सामने यह समझने की चुनौती है कि रोड शो की भीड़ मतदाता बनकर किसके पक्ष में आती है।
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मोदी के बाद राहुल का रोड शो

उधर, शह-मात के खेल के बीच नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा अरुण जेटली ने आयोग पर फिर निशाना साधा है कि जहां मोदी को चुनाव प्रचार की अनुमति नहीं मिली उसी स्थान पर राहुल को कैसे दे दी गई। चुनाव प्रचार खत्म होने के अंतिम दिनों में काशी में जमकर राजनीतिक घमासान हुआ। अल्पसंख्यक मतों को लुभाने के लिए दांव चले गए तो भाजपा से खुद को लड़ाई में दिखाने के लिए ताकत का प्रदर्शन भी किया गया।

पुराने शहर के बीचोबीच नरेंद्र मोदी के अघोषित रोड शो के बाद चौकन्नी हुई कांग्रेस ने जहां आननफानन में ऐलान कर राहुल का रोड शो कराया वहीं सपा ने सौ से अधिक स्थानों पर स्वागत रखकर अखिलेश यादव के छोटे रोड शो से ही जनता के बीच पार्टी की पैठ दर्शाने की कोशिश की।

चुनावी घमासान के अंतिम दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अजय राय के समर्थन में 11 किमी लंबा रोड शो कर ताकत का अहसास कराया। सपा भी पीछे नहीं रही और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में करीब तीन किमी लंबा रोड शो निकालकर सरकार की साख का मुजाहिरा किया।
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केजरीवाल ने भी दिखाई ताकत

बताते चलें, मोदी के रोड शो के बाद आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल ने नौ मई को रोड शो के दौरान अपनी ताकत तो दिखाई ही थी, बाद में हुई सभा में भाजपा और कांग्रेस पर अडानी और अंबानी के संबंधों को लेकर जमकर तीर भी चलाए। नौ मई को ही गौराकलां के जाल्हूपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा के विरोध में अल्पसंख्यक मतों से न बिखरने का आह्वान किया।

अब एसएमएस वार
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद मतदाताओं तक अपनी पहुंच कायम रखने के लिए पार्टियां फिर एसएमएस और वॉयस मैसेज का सहारा ले रही हैं। पार्टियों ने शनिवार शाम से मतदाताओं के फोन पर वॉयस मैसेज और एसएमएस भेजकर प्रत्याशी को जिताने की अपील शुरू कर दी है।
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