आमचुनाव के दौरान चुनाव पूर्व सर्वेक्षण बेरोकटोक जारी रहेंगे। दरअसल चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें उसने आयोग को अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग कर चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर रोक लगाने की सलाह दी थी। आयोग ने अपनी ओर से चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर रोक लगाने के बजाय सरकार को खुद इस मुद्दे पर कानून बनाने की सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार बीते साल कुछ राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान से ही लगातार चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर रोक के पक्ष में रही है। दूसरी ओर, विपक्ष खासतौर पर भाजपा चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर रोक के खिलाफ है। चुनाव आयोग की रुख से लोकसभा चुनाव में चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के प्रसारण और प्रकाशन पर रोक की संभावना खत्म हो गई है।
चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय की सलाह को खारिज कर दिया है। मंत्रालय को दिए जवाब में आयोग ने कहा है कि ठीक चुनाव के समय वह संविधान में दिए गए अधिकारों का उपयोग नहीं करना चाहता। वह चाहता है कि इस मुद्दे पर खुद सरकार कानून बनाए।