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अमित शाह और आजम खान की चुनावी सभाओं पर प्रतिबंध

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नरेंद्र मोदी के मजबूत सिपहसलार व यूपी भाजपा के प्रभारी अमित शाह और यूपी में सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ चुनाव आयोग का डंडा चल गया है।
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इनके विवादित बयानों को बेहद गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने दोनों की चुनावी सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग ने ‘बदला लेने’ के बयान में फंसे शाह और ‘कारगिल की जीत मुसलमान सैनिकों की वजह से होने के’ आजम के बयान को बेहद आपत्तिजनक मानते हुए शुक्रवार शाम यह फैसला किया।

इसके तहत आयोग ने दोनों नेताओं की यूपी में तमाम चुनावी सभाओं, रैलियों और रोड शो पर रोक लगाने के अलावा राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
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यूपी सरकार को भी फटकार

दोनों नेताओं से अभी तक नरमी बरते जाने पर आयोग ने यूपी सरकार को भी फटकार लगाई है। आयोग ने इन नेताओं के विरुद्ध निषेधात्मक कार्रवाई करने की भी हिदायत दी है। चुनाव आयोग ने आजम खां तथा अमित शाह के बयानों को समाज को बांटने वाला तथा आपस में घृणा फैलाने वाला माना है।

आयोग ने इनके बयानों पर शिकायत के बाद नोटिस देकर जवाब मांगा था, लेकिन न तो अमित शाह ने और न ही आजम खां ने नोटिस का कोई जवाब अभी तक दिया है। आयोग इन दोनों को दोबारा नोटिस भी भेजने जा रहा है।

यह अलग बात है कि नोटिस मिलने के बाद भी आजम लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं। रामपुर जिला प्रशासन की ओर से ऐसी रिपोर्ट आयोग को मिली है। इस कठोर फैसले से आयोग ने इस भ्रम को तोड़ा है कि आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में चुनाव आयोग फटकार लगाने की सीमा से ज्यादा कुछ नहीं कर सकता।

आपराधिक मामला होगा दर्ज

चुनाव आयोग ने आजम खां तथा अमित शाह के बयानों को आचार संहिता का उल्लंघन का मामला होने के साथ ही आईपीसी की धारा 153-ए, 153-बी, 295-ए, तथा 505 (2) के तहत आपराधिक मामला भी बताया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

आयोग ने दोनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर 12 अप्रैल की शाम पांच बजे तक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

चुनाव आयोग का कहना है कि इस तरह के बयान लोगों में बैर भावना बढ़ाने के अलावा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले हैं। धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए इस तरह के भड़काऊ भाषणों को रोकना बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं को जनसभा, चुनावी रैली और रोड शो करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

अमित शाह का ‘बदला’

गत 3 अप्रैल को अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के शामली में जनसभा में कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौजूदा चुनाव सम्मान के लिए है। यह अन्याय करने वालों को सबक सिखाने का वक्त है। अपमान का ‘बदला’ लिया जाना चाहिए। अब आपको बटन दबाकर ज्यादतियों का जवाब देना चाहिए।

आजम ने दिया था कारगिल को सांप्रदायिक रंग
गाजियाबाद में एक रैली के दौरान बीते दिनों सपा नेता आजम खां ने कारगिल युद्ध को ही सांप्रदायिक रंग दे दिया था। उन्होंने कहा था कारगिल युद्ध में भारत को मुस्लिम सैनिकों ने जीत दिलाई। जब हम कारगिल जीते तो वहां कोई हिंदू सैनिक नहीं था।

चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सफाई

चुनाव आयोग का डंडा चलने के बाद समाजवादी पार्टी और भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों पार्टियों ने अपने नेताओं के बचाव में सफाई दी है। समाजवादी पार्टी ने आयोग से इस मामले पर पुनर्विचार की अपील की है।

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि आजम खां एक सेक्युलर नेता हैं। वह हिंदुओं में भी काफी लोकप्रिय हैं जबकि भाजपा नेता अमित शाह सांप्रदायिकता के मास्टरमाइंड हैं। दोनों के साथ एक जैसा व्यवहार उचित नहीं है। चुनाव आयोग को निष्पक्ष ढंग से काम करना चाहिए और फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। आजम खान ने आयोग की कार्रवाई को गलत बताया है। आजम का कहना है कि उन्होंने रैलियों और जनसभाओं में कुछ गलत नहीं कहा है।

वहीं भाजपा ने भी अमित शाह को सही ठहराया है। भाजपा का कहना है कि वोट के जरिए बदलाव की बात कहकर अमित शाह ने कुछ भी गलत नहीं किया है। कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सपा और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। विवादित बयान को लेकर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए।

आचार संहिता को लेकर सख्त हुआ आयोग

आचार संहिता उल्लंघन पर सख्ती बरतते हुए चुनाव आयोग ने दोषी नेताओं के खिलाफ आयोग की कार्रवाई के साथ ही पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया है। चुनावी कार्यक्रमों का आयोजन करने वालों को कार्यक्रम की वीडियोग्राफी कराकर प्रशासन को सीडी सौंपनी होगी। जिला व राज्य स्तर पर आचार संहिता को लेकर दर्ज होने वाले मामलों की आयोग ने निगरानी कराने को भी कहा है।

नेताओं की ओर से बार-बार आचार संहिता का उल्लंघन किये जाने के बाद चुनाव आयोग ने अब सख्ती बरतने का फैसला लिया है। आयोग ने सभी प्रदेश के सीईओ को निर्देश दिया है कि खुद जिला प्रशासन चुनावी रैलियों व सभाओं की वीडियोग्राफी नियमित रूप से कराये। साथ ही कार्यक्रम की अनुमति लेने वाले आयोजक भी कार्यक्रम का वीडियो तैयार कराकर छह घंटे के अंदर दो सीडी प्रशासन को दें। जिला निर्वाचन अधिकारी के साथ ही एसपी भी अब आचार संहिता का उल्लंघन होने पर उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित करायेंगे। प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी इन एफआईआर पर होने वाली कार्रवाई के बारे में भी नियमित रूप से जिला प्रशासन के माध्यम से नजर रखेंगे।

आयोग ने जहां जिले के अधिकारियों को आचार संहिता के उल्लंघन के सभी महत्वपूर्ण मामलों की सूचना प्रतिदिन सीईओ को देने का निर्देश दिया है, वहीं राज्य स्तर पर सीईओ को भी मीडिया में आने वाली ऐसी खबरों के बारे में संबंधित जिला अधिकारियों को एसएमएस भेजकर सूचित करने को कहा गया है। जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति देते समय संबंधित दलों को माडल कोड कंडक्ट के निर्देशों की एक कापी भी इस शर्त के साथ उपलब्ध कराई जाए कि वे उसका पालन सुनिश्चित करायेंगे।
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आजम-शाह की जुबान पर रोक से खलबली

सपा के कद्दावर नेता आजम खां और मोदी के करीबी अमित शाह पर चुनावी सभाएं करने पर लगी रोक के बाद पार्टियों में खलबली मच गई है। दोनों ही नेताओं को कई सभाएं करनी थीं। लेकिन अब यह दोनों कोई मीटिंग या जनसभा नहीं कर सकेंगे।

कैबिनेट मंत्री आजम खां पिछले करीब बीस दिनों से लगातार सभाएं कर रहे थे। रामपुर, संभल, गाजियाबाद समेत कई लोकसभा सीटों पर जनसभाएं करके विरोधियों पर हमले किए। सपा सरकार द्वारा कराए गए काम गिनाकर पब्लिक से वोट मांगे थे। उनके बयान भी सुर्खियां बने रहे। कई बयानों पर ‘सियासी तूफान’ भी मचा। आयोग तक मामला पहुंच गया था। आजम को अभी आगे भी कई जनसभाएं करनी थीं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ सपा के सियासी मंच पर नजर आते। मगर आयोग द्वारा रोक लगाए जाने के बाद पार्टी और प्रत्याशियों में खलबली मच गई है। वहीं नरेंद्र मोदी के करीबी और यूपी प्रभारी अमित शाह भी प्रदेश भर में जनसभाएं कर रहे थे। बिजनौर, मेरठ समेत कई इलाकों में उनकी मीटिंगें हो चुकी हैं।

आगे भी कई शहरों में सभाएं करने की तैयारी थी। लेकिन चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक के बाद अब वह भी कहीं सभा नहीं कर सकेंगे। सबसे बड़ी दिक्कत उन प्रत्याशियों के सामने आ गई है जो उनकी सभाएं कराने के लिए तैयारी किए बैठे थे। कुल मिलाकर आयोग के एक्शन से पार्टियों में खलबली मच गई है। वहीं दूसरे दलों में भी बेचैनी है। सभी ने अपने नेताओं को नसीहतें देनी शुरू कर दी हैं।
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