चुनाव आयोग ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की आईएसआई से संबंधित टिप्पणी को लेकर उन्हें नोटिस थमाया है।
राहुल ने कहा था कि मुजफ्फरनगर दंगों के कुछ पीड़ित पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में हैं। इस टिप्पणी को लेकर भाजपा ने राहुल पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उनकी शिकायत की थी।
चुनाव आयोग ने राहुल के 23 अक्तूबर को राजस्थान के चुरू और 24 अक्तूबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में दिए गए भाषण की समीक्षा करने के बाद बृहस्पतिवार को उन्हें नोटिस जारी किया।
आयोग ने राहुल को जवाब देने के लिए 4 नवंबर को 11:30 बजे तक का वक्त दिया है और पूछा है कि उन पर आचार संहिता उल्लंघन की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
नोटिस में आयोग ने कहा है कि प्रथम दृष्ट्या लगता है कि राहुल के भाषणों से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। राहुल अगर तय समय सीमा के अंदर जवाब नहीं देते हैं तो माना जाएगा कि वह कुछ नहीं कहना चाहते हैं और ऐसे में आयोग उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आगे कदम उठाएगा।
निराधार आरोप लगाने से बचें
आयोग के मुताबिक आचार संहिता कहती है कि कोई भी पार्टी या प्रत्याशी समुदायों, जाति या धर्म के बीच घृणा फैलाने या तनाव पैदा करने के कृत्यों में लिप्त नहीं होगा। संहिता में साफ कहा गया है कि दूसरे दलों पर निराधार आरोप लगाने से बचना चाहिए और वोट हासिल करने के लिए जाति या संप्रदाय के आधार पर कोई अपील नहीं की जानी चाहिए।
'कांग्रेस की मान्यता समाप्त करने की मांग'
मालूम हो कि भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त से कांग्रेस की मान्यता समाप्त करने और उसका चुनाव चिन्ह जब्त करने की मांग की थी। भाजपा ने कहा था कि राहुल ने भाषणों में वोट के लिए लोगों को धर्म तथा संप्रदाय के आधार पर बांटने की कोशिश की है। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेता बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा घृणा और नफरत की राजनीति कर रही है।