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'चुनावी खर्च का गलत ब्यौरा देने पर अयोग्य ठहराने का है अधिकार'

Mon, 03 Jun 2013 01:00 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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केंद्र सरकार के रुख का कड़ा विरोध करते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके पास चुनावी खर्च का गलत ब्यौरा पेश करने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने का अधिकार है।
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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से जुड़े पेड न्यूज मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

साथ ही कानून मंत्रालय की ओर से सर्वोच्च अदालत में दी गई उस दलील का कड़ा विरोध कर अपना बचाव किया है जिसमें कहा गया था कि आयोग के पास चुनावी खर्च का गलत ब्यौरा देने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने का अधिकार नहीं है।

सर्वोच्च अदालत में दाखिल हलफनामे में आयोग ने कहा है कि चुनाव आयोग यह मानता है और समझता है कि धारा 10 ए के तहत उसके अधिकार केवल सेवा संबंधी नहीं हैं जो खर्च के ब्यौरे की रूपरेखा पर सिर्फ जिला चुनाव अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त करने और खर्च का ब्यौरा पेश करने की समय सीमा तक सीमित हों।
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आयोग ने कहा है कि चुनाव आयोग यह भी मानता है कि विधायिका सिर्फ जरूरी ब्यौरा पेश करने में विफलता से जुड़े सेवा संबंधी उल्लंघन और सही खाता नहीं बनाए रखने की गंभीर खामी के लिए किसी उम्मीदवार को तीन साल के लिए अयोग्य ठहराने जैसा सख्त दंड देने के अधिकार पर अमल नहीं करेगी।

आयोग के मुताबिक वह केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खर्च का ब्यौरा रखने के कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी अधिकार है।

चुनाव आयोग के हलफनामे में कहा गया है कि यदि उम्मीदवार अपने चुनावी खर्च का सही ब्यौरा नहीं रखते हैं तो आयोग को चुनाव आयोजित करने के नियम की धारा 89 (5) और जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 10ए के तहत उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का आदेश देने का अधिकार है।

आयोग ने कहा है कि यदि उम्मीदवार का खर्च निर्धारित सीमा से काफी अधिक है। लेकिन वह आयोग को चुनावी खर्च का गलत ब्यौरा देता है और उसके खिलाफ कोई चुनावी याचिका नहीं है तो यह कहना अतर्कसंगत होगा कि चुनाव आयोग ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। जबकि आयोग के पास यह साक्ष्य हो कि चुनावी खर्च का गलत ब्यौरा दिया गया है।

चुनाव आयोग ने कहा कि यह समान अवसर देने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की भावना को बाधित करेगा। आयोग ने इस संबंध में 1999 में शिवराम गौड़ा बनाम पीएम चंद्रशेखर मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला हलफनामे में दिया है।
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गौरतलब है कि इस मामले में सर्वोच्च अदालत का आदेश न सिर्फ चव्हाण का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि अन्य उम्मीदवारों पर भी रुख स्पष्ट होगा।
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