वरिष्ठ भाजपा नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री जरूर हैं पर लीडर नहीं। वे न तो देश के लीडर हैं और न ही उस कांग्रेस पार्टी के जिससे वे जुड़े हैं। उनकी पार्टी का नेता कोई और है। इसीलिए वे कुछ कर पाने में सफल नहीं हैं।
वर्तमान में देश में जो अविश्वास का माहौल बना हुआ है उसके लिए विपक्ष नहीं खुद सरकार दोषी है। नेतृत्व की इस कमी का खामियाजा आज हम सभी भुगत रहे हैं।
सुषमा स्वराज ने फिक्की की 85वीं जनरल मीटिंग में देश भर के उद्यमियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज देश में एक अविश्वास का माहौल बना हुआ है। रोज नये घोटालों का खुलासा हो रहा है।
बड़े-बड़े उद्योगपति व मंत्री जेल जा रहे हैं। सरकार बड़े फैसले लेने में असफल है। ऐसे नकारात्मक माहौल का देश की अर्थव्यवस्था पर असर तो पड़ेगा ही।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी नाकामयाबी के लिए कभी विपक्ष को दोष देते हैं तो कभी गठनबंधन सरकार की मजबूरियां बताते हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि हम जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका में हैं। हमारे लिए देशहित सबसे पहले है।
सभी जानते हैं कि जितने भी घोटाले के मामले यूपीए सरकार में सामने आए है, सरकार ने नहीं बल्कि सरकारी एजेंसी सीएजी की जांच में सामने आए हैं। क्या हमें सरकार की इन गलतियों पर चुप बैठे रहना चाहिए।
सुषमा ने कहा कि जहां तक गठबंधन का सवाल है तो भाजपा के शासनकाल में तो 24 दलों का गठबंधन था। हमने पांच साल के शासन में देश की अर्थव्यवस्था को जितना मजबूत किया था कांग्रेस ने पिछले आठ साल के शासन में उसे पीछे धकेल दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बनाने से किसी देश की अर्थव्यवस्था को नहीं सुधारा जा सकता है उसके लिए सकारात्मक माहौल होना चाहिए। लेकिन मनमोहन सिंह यह करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हुए हैं।
सुषमा स्वराज ने कहा कि दुनियाभर के अर्थशास्त्री मानते हैं कि भारत में आर्थिक महाशक्ति बनने की संभावना है। हमारे देश में सबसे अधिक युवावर्ग है। आज देश में एक एंटरप्रेन्योरशिप पालिसी की आवश्यकता है। इस दिशा में सरकार को जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए।
हम देश के विकास के लिए रचनात्मक विपक्ष की भूमिका से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहाकि फिक्की सरकार तथा विपक्ष से अलग अलग बात करने की जगह पहल करके एक गोलमेज बैठक आयोजित करे जिसमें सभी सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ उद्यमी तथा प्रतिपक्ष के लोग भी शामिल होकर ऐसे रास्ते की तलाश करें जिससे देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाया जा सके।