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पीएम बनने के मुलायम के ख्वाब पर ग्रहण

Mon, 16 Sep 2013 11:19 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
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मुजफ्फरनगर में दंगा और सूबे में बढ़ते अपराध ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के पीएम बनने के ख्वाब पर ग्रहण लगा दिया है।
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नेताजी के लखनऊ से दिल्ली तक के सफर पर सवाल उठने लगे हैं। साथ ही तीसरे मोर्चे की मुलायम की अगुवाई करने की दावेदारी को भी धक्का लगा है।

वामदल समेत कई छोटे-बड़े दल दंगे को लेकर सपा को आड़े हाथों लेने लगे हैं। इनमें वे दल भी शामिल हैं जिनसे तालमेल कर मुलायम चुनाव बाद तीसरे मोर्चे को मजबूत बनाने का दांव फेंक रहे हैं।

दंगों के दौरान आगरा में हुई सपा कार्यकारिणी में पार्टी के राजनीतिक प्रस्ताव में जोर शोर से कहा गया कि लोकसभा चुनाव के बाद देश में मुलायम सिंह यादव की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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मगर प्रदेश के मौजूदा हालात की वजह से सपा को लेकर माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। खासकर दंगों को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी सवालों के घेरे में हैं।

प्रदेश सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में दंगों का आंकड़ा 100 को पार कर गया है। दंगे यहीं नहीं रुके तो लोकसभा चुनाव के बाद मुलायम का तीसरे मोर्चे का अगुवा बनना मुश्किल हो सकता है।
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उन्हें मोर्चे में भले ही शामिल कर लिया जाए, मगर उन्हें सामने रखना बाकी दलों को खल सकता है। इस बारे में भाकपा नेता अतुल अंजान कहते हैं कि तीसरा मोर्चा नीतियों पर बनेगा। आम सहमति का प्रधानमंत्री होगा। बिना वामदलों के समर्थन के कोई पीएम नहीं बन सकता।

माकपा नेता वृंदा करात कहती है कि आरएसएस और भाजपा के भड़काने के अलावा सपा सरकार की कमजोरी की वजह से दंगों ने घातक रूप लिया।

अब भी सरकार हालात को काबू में नहीं कर पाई है। शिविर में शरणार्थियों को भी सपा प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है।
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