चुनाव आयोग मल्टी नेशनल फर्म वेदांता समूह की सहायक कंपनियों से अनुदान लेने के मामले में कांग्रेस और भाजपा द्वारा विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के संदिग्ध उल्लंघन के मामले की जांच कराना चाहता है। आयोग ने इस आशय का पत्र केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा है।
चुनाव आयोग द्वारा आयकर विभाग की मदद से की गई छानबीन में दोनों पार्टियों द्वारा वेदांता समूह की कंपनियों स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और सेसा गोवा ग्रुप से 5-5 करोड़ अनुदान लेने की जानकारी मिली है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29बी का उल्लंघन किया गया है।
इस धारा में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी विदेशी स्रोत्र से दान नहीं ले सकती है। चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय गृह मंत्रालय से की है। आयोग ने कहा है कि इस मामले की जांच विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत कराई जानी चाहिए, क्योंकि अनुदान देने वाली दोनों कंपनियां यूके की कंपनी वेदांता समूह की सहायक कंपनी हैं।
वर्ष 2011-12 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वेदांता समूह ने पिछले तीन साल में भारत में राजनीतिक पार्टियों को करीब 28 करोड़ रुपये (5.69 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का अनुदान दिया है। वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल ने लाभार्थियों की पहचान बताने से इनकार करते हुए रिपोर्ट में कहा है कि समूह ने वर्ष 2011-12 में राजनीतिक पार्टियों को 2.01 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया है। इस मामले में भाजपा की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है, जबकि कांग्रेस ने विदेशी स्रोत से अनुदान लेने की बात से इनकार किया है।