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बच्चा गोद लेना हुआ आसान, सरकार का बड़ा फैसला

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बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए केंद्र सरकार ने अब इसके लिए पुलिस सहमति प्रमाणपत्र की बाध्यता को खत्म कर दिया है।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश में गोद लेने की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रक्रिया में बदलाव पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए भी लिया गया है।

हालांकि विदेश से भारत आकर बच्चा गोद लेने वालों के लिए पुलिस की पड़ताल अनिवार्य ही रहेगी।मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घरेलू स्तर पर इससे जुड़ी शिकायतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।
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यही वजह है कि पुलिस वेरिफिकेशन की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। मंत्रालय ने हाल ही में गोद लेने से पहले गैर सरकारी संगठनों के जरिए किए जाने वाले होम स्टडी रिपोर्ट (आवास अध्ययन रिपोर्ट) के नए फॉर्मेट को जारी किया है।

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सरकार ने खत्म की पुलिस की भूमिका

इसके आधार पर ही कोई गोद लिए बच्चे का कानूनी रूप से अभिभावक बन सकता है। अधिकारी ने कहा कि इस फॉर्मेट में नए बदलाव कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से अभिभावक के आपराधिक रिकॉर्ड की छानबीन नहीं की जाती है।

ऐसे में पुलिस के पड़ताल की जरूरत का कोई मतलब नहीं है। ऐसी कई शिकायतें भी आई हैं जिनमें पुलिस की वजह से गोद लेने की प्रक्रिया महीनों तक अधर में अटकी रही। सरकार की मंशा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, न कि भावी अभिभावकों को जटिल प्रक्रिया से गुजारना। उन्होंने इस प्रक्रिया को समझने में पुलिस की असमर्थता को भी उजागर किया।

अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर अभिभावक जो बच्चा गोद लेना चाहते हैं उनके पास पैन कार्ड, पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, ऐसे में अपराधी की तरह उनकी जांच करने की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पुराने फॉर्मेट में गोद लेने वाले अभिभावकों के नजदीकियों के लिखित संदर्भ लेने का प्रावधान है लेकिन ज्यादातर एनजीओ अभिभावक के घर का मुआयना करते हुए पड़ोसी, परिवार के दूसरे सदस्यों से नहीं मिलते हैं। इसलिए नए फार्म में एनजीओ की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए उन्हें इस बाबत विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।

घरेलू स्तर पर गोद लेने के लिए दस्तावेज की जरूरत
बाल अध्ययन रिपोर्ट जिस पर अभिभावक के हस्ताक्षर और बच्चे की फोटो लगी हो। बच्चे का मेडिकल जांच, बाल कल्याण समिति का प्रमाणपत्र, आवास अध्ययन रिपोर्ट के साथ उनकी फोटो, दो बाहरी लोगों के प्रमाण, पैन कार्ड, आवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, विवाह या तलाक का प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, अधिकृत एजेंसी का सर्टिफिकेट का होना जरूरी है।

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