आगामी लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच देश के विभिन्न राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों ने अपने उन मुद्दों की ढपली बजानी भी शुरू कर दी है, जो अभी तक पिटारे में बंद थे।
कॉमनवेल्थ खेलों से लेकर कोयला खदानों के घोटाले तक के आरोप झेल रही कांग्रेस को जहां भ्रष्टाचार अब देश का सबसे बड़ा दुश्मन नजर आने लगा है, वहीं अभी तक हिंदुत्व को अपने राजनीतिक तरकश का ब्रह्मास्त्र मानने वाली भाजपा भी अब विकास के मॉडल दिखाकर सत्ता के ख्वाब देख रही है।
इन सबके बीच अन्य संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाले विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने एक बार फिर विवादास्पद बयान दिया है। सिंघल के इस बयान से सियासी गलियारों में खलबली मच गई है।
धर्मांतरण पर तुरंत रोक लगे
विश्व हिंदू परिषद के संयोजक अशोक सिंघल ने शनिवार को कहा कि देश में धर्मांतरण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। अगर धर्मांतरण पर रोक नहीं लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं जब इस देश में हिंदुओं की गिनती अल्पसंख्यकों में होगी।
सिंघल यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि इस देश के प्रत्येक हिंदू दंपति को अनिवार्य रूप से 5 बच्चे पैदा करने चाहिएं। सिंघल ने ये बातें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।
यह पहली बार नहीं है, जब अशोक सिंघल ने ऐसा विवादास्पद बयान दिया है। इससे पहले भी सिंघल हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर विवादस्पद बयान दे चुके हैं।
मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन
इस मौके पर अशोक सिंघल ने कई मुद्दों को लेकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की तारीफ की, वहीं उन्हीं बातों पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद का भाजपा के साथ कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हम अगले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में खुलकर समर्थन करेंगे।
सिंघल ने कहा कि अगर मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो फिर केंद्र की सरकार किसी भी विदेशी ताकत से नहीं डरेगी, फिर चाहे वो अमेरिका ही क्यों ना हो। इससे पहले अशोक सिंघल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से करीब 1 घंटे की मुलाकात की।