आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मामले में सपा और केंद्र सरकार आमने सामने आ गई है।
इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठी के बाद हरकत में आई केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है
जबकि सपा ने यह कह कर अपने आक्रामक तेवर कायम रखे हैं कि ऐसे पत्र को वह कोई महत्व नहीं देता।
खाद्य सुरक्षा विधेयक का समर्थन नहीं करेगी सपा!
इस बीच सपा ने खाद्य सुरक्षा विधेयक का समर्थन न करने और जरूरत पड़ने पर इसके खिलाफ मतदान करने की घोषणा कर इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने सोनिया पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें केंद्र के घोटाले पर ध्यान देने की नसीहत दे डाली है।
मामले में भाजपा भी कूदी
इस बीच पूरे मामले में भाजपा भी कूद गई है। सपा के सुर में सुर मिलाते हुए पार्टी ने कहा है कि सोनिया को हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका सहित कांग्रेसशासित राज्यों में भी ईमानदार अधिकारियों के तबादले पर पत्र लिखना चाहिए था।
हालांकि सपा सूत्रों का कहना है कि निलंबन विवाद जल्द ही हल हो जाएगा।
सोनिया की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी के ठीक एक दिन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आ गया। कार्मिक मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिख कर इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी है। पत्र में आईएएस एसोसिएशन की शिकायत का हवाला देते हुए इस पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी गई है।
'सोनिया की चिट्ठी का महत्व नहीं'
हालांकि केंद्र के इस कदम ने सपा को और नाराज कर दिया है। मंत्रालय के रिपोर्ट तलब करने से नाराज सपा के सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि राजा (अखिलेश यादव) जो करता है, ठीक करता है। केंद्र के पत्र को औचित्यहीन बताते हुए अग्रवाल ने कहा कि केंद्र के मन में जो आए करे, हमारे लिए इस पत्र का कोई महत्व नहीं है।
इस मामले में अग्रवाल ने सोनिया पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोनिया पहले केंद्र के घोटालों पर ध्यान दें। उन्होंने आईएएस एसोसिएशन को चापलूस संगठन करार दिया।
इसके साथ ही यह भी कहा कि सपा खाद्य सुरक्षा विधेयक का किसी कीमत पर समर्थन नहीं करेगी। जरूरी हुआ तो इसके खिलाफ संसद में मतदान भी करेगी।